जापान के आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री ताकाइची विवादित स्मारक पर नहीं गईं

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जापान के आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री ताकाइची विवादित स्मारक पर नहीं गईं

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  • Publish Date - August 15, 2026 / 07:35 PM IST,
    Updated On - August 15, 2026 / 07:35 PM IST

तोक्यो, 15 अगस्त (एपी) जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने शनिवार को द्वितीय विश्व युद्ध में जापान के आत्मसमर्पण की 81वीं वर्षगांठ के अवसर पर तोक्यो स्थित विवादित यासुकुनी स्मारक जाने से परहेज किया। माना जा रहा है कि उन्होंने इस कदम के जरिए चीन और दक्षिण कोरिया के साथ जापान के राजनयिक संबंधों को प्राथमिकता देने की कोशिश की।

हालांकि, अपने संबोधन में उन्होंने एशिया में अपने देश के युद्धकालीन अतीत का कोई उल्लेख नहीं किया और न ही उस अतीत को लेकर किसी तरह का पश्चाताप व्यक्त किया।

यासुकुनी स्मारक की स्थापना युद्धों में मारे गए 24 लाख से अधिक लोगों के सम्मान में की गई थी। यह स्मारक उस समय विवादों के केंद्र में आ गया जब वहां द्वितीय विश्व युद्ध के दोषी ठहराए गए 14 जापानी युद्ध अपराधियों को भी शामिल किया गया।

चीन और दक्षिण कोरिया का कहना है कि जापानी अधिकारियों का यासुकुनी स्मारक जाना जापान द्वारा युद्धकालीन अत्याचारों पर पर्याप्त पश्चाताप न होने को दर्शाता है।

ताकाइची ने हिरोशिमा, नागासाकी और ओकिनावा में हुई भारी तबाही के पीड़ितों के साथ-साथ विदेशों में युद्ध के मोर्चों पर मारे गए लोगों के प्रति शोक व्यक्त किया। उन्होंने उनके बलिदान को ‘जापान की शांति और समृद्धि की नींव’ बताया।

तोक्यो के बुडोकान हॉल में अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ‘‘युद्ध की समाप्ति के बाद से जापान ने लगातार विश्व शांति और समृद्धि में योगदान दिया है। हम युद्ध की त्रासदी को दोबारा कभी नहीं होने देंगे।’’

बुडोकान हॉल यासुकुनी स्मारक से कुछ ही दूरी पर है।

ताकाइची ने यह भी कहा कि जापान क्षेत्र में एक ‘विश्वसनीय राष्ट्र’ के रूप में वैश्विक चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी, तीन अन्य कैबिनेट मंत्री और ताकाइची की सत्तारूढ़ पार्टी के तीन वरिष्ठ अधिकारी शनिवार सुबह यासुकुनी स्मारक पहुंचे। इसके अलावा, विभिन्न राजनीतिक दलों के दर्जनों सांसदों के एक गैर-दलीय समूह ने भी वहां प्रार्थना की।

इन यात्राओं को लेकर चीन के विदेश मंत्रालय ने जापान के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया। चीन ने आरोप लगाया कि जापानी राजनेताओं का वास्तविक उद्देश्य ‘‘युद्ध अपराधियों के खिलाफ दिए गए फैसले को बदलना, जापान के युद्ध अपराधों को छिपाना, ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना और सैन्यीकरण को तेज करने का रास्ता तैयार करना’’ है।

चीन ने जापान से इतिहास पर ‘गंभीर आत्ममंथन’ करने और सैन्यवाद से पूरी तरह दूरी बनाने का भी आग्रह किया।

एपी शोभना संतोष

संतोष