कतर : महिलाओं की जांच करने वाले अधिकारियों का मामला लोक अभियोजक कार्यालय भेजा गया

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कतर : महिलाओं की जांच करने वाले अधिकारियों का मामला लोक अभियोजक कार्यालय भेजा गया

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  • Publish Date - October 30, 2020 / 01:48 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:48 PM IST

दुबई, 30 अक्टूबर (एपी) कतर ने शुक्रवार को कहा कि उसने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अधिकारियों पर संभावित आरोपों के मामले अभियोजकों के पास भेज दिए हैं। एक लावारिस बच्चे के पाए जाने के बाद कतर एयरवेज की उड़ानों पर सवार महिलाओं का जबरन लैंगिक परीक्षण कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ गुस्सा भड़कने के बाद कतर का यह बयान आया है।

दो अक्टूबर को हुई घटना पर ऑस्ट्रेलिया की सरकार द्वारा क्षोभ जाहिर करने और यूनियन के कर्मचारियों द्वारा सिडनी में कतर एयरवेज के विमान पर काम नहीं करने की धमकी देने के बाद कतर की सरकार हरकत में आई है।

कतर एयरवेज के लिए ऑस्ट्रेलिया एक महत्वपूर्ण मार्ग है।

कतर सरकार के संचार कार्यालय ने एक बयान जारी कर बच्चे को लावारिस छोड़ने को उसकी ‘‘हत्या का प्रयास’’ करार दिया।

बयान में कहा गया, ‘‘इसके बाद हवाई अड्डे पर अधिकारियों द्वारा कई महिला यात्रियों की जांच सहित की गई प्रक्रिया से पता चलता है कि मानक प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया। इन उल्लंघनों और अवैध कार्रवाइयों के लिए जिम्मेदार लोगों का मामला लोक अभियोजन कार्यालय के पास भेजा गया है।’’

बयान में यह नहीं बताया गया कि आदेश किसने दिए थे। इसने कहा कि कतर के अधिकारियों द्वारा जांच जारी है और जिन महिलाओं का जबरन परीक्षण कराया गया, उनसे देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री शेख खालिद बिन खलीफा बिन अब्दुलअजीज अल थानी ने ‘‘माफी’’ मांगी है।

बयान में बताया गया, ‘‘जो भी हुआ, वह कतर की संस्कृति और मूल्यों के खिलाफ है। कतर सभी यात्रियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।’’

ऑस्ट्रेलिया तथा नौ अन्य स्थानों के लिए रवाना होने वाले यात्रियों की शारीरिक जांच से ऑस्ट्रेलिया में क्षोभ है और वहां की सरकार ने जांच को अनुपयुक्त तथा महिलाओं की तरफ से स्वतंत्र एवं जानकारी के तहत सहमति देने की परिस्थितियों के बाहर बताया।

मामला इस हफ्ते प्रकाश में आने के बाद कतर की सरकार ने माफी मांगी और पूरी जांच का वादा किया जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा किया जाएगा।

पश्चिम एशिया के अधिकतर देशों की तरह कतर में भी शादी से इतर बच्चों के जन्म को अपराध माना जाता है।

एपी नीरज मनीषा

मनीषा