(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 20 मई (भाषा) संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों पर आगे बढ़ने का एक ‘‘यथार्थवादी’’ रास्ता पेश करते हुए, जी4 समूह के देशों भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान ने प्रस्ताव दिया है कि विस्तारित परिषद में नए स्थायी सदस्य समीक्षा अवधि के दौरान निर्णय लंबित रहने तक वीटो का प्रयोग नहीं करेंगे।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने सुरक्षा परिषद में सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) की बैठक में जी4 देशों की ओर से एक बयान देते हुए कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार के लिए दुनिया बहुत लंबे समय से इंतजार कर रही है, और हम इसके परिणाम देख रहे हैं।’’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह चर्चा आईएनजी प्रक्रिया का व्यापक जायजा लेने के लिए एक अच्छा मंच है, जिसमें हासिल की गई प्रगति का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन (यदि कोई हो) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सार्थक सुधारों को लागू करने के लिए एक यथार्थवादी मार्ग तैयार करना शामिल है।
वीटो के प्रश्न पर जी4 के लचीले रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यह समूह ‘‘इस बात पर जोर देता है कि स्थायी श्रेणी के भीतर कोई उप-श्रेणी नहीं हो सकती।’’
पर्वतनेनी ने कहा, ‘‘इसी कारण जी4 का यह मानना है कि नए स्थायी सदस्यों के पास सैद्धांतिक रूप से वर्तमान सदस्यों के समान ही जिम्मेदारियां और दायित्व होने चाहिए।’’
उन्होंने इस मुद्दे पर रचनात्मक वार्ता को बढ़ावा देने के लिए ‘‘खुलापन और लचीलापन’’ दिखाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ‘‘जी4 का प्रस्ताव है कि नए स्थायी सदस्य तब तक वीटो का प्रयोग नहीं करेंगे, जब तक कि इस विषय पर 15 साल की समीक्षा के दौरान कोई निर्णय नहीं हो जाता।’’
भारत का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की मौजूदा संरचना एक अलग युग की है और यह वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती।
यूएनएससी सुधार के लिए जी4 मॉडल की व्यापक रूपरेखा में सुरक्षा परिषद की सदस्य संख्या को वर्तमान के 15 से बढ़ाकर 25 या 26 करने का प्रस्ताव, जिसमें 11 स्थायी सदस्य और 14 या 15 अस्थायी सदस्य होंगे।
जी4 ने लघु द्वीप विकासशील देशों (एसआईडीएस) के पर्याप्त और निरंतर प्रतिनिधित्व के प्रति अपने सकारात्मक रुख पर भी बल दिया। उसने कहा कि क्षेत्रीय समूहों के अतिरिक्त अंतर-क्षेत्रीय समूहों में सदस्यता रखने वाले सदस्य देशों के साथ व्यवहार जैसे पहलुओं को स्पष्ट करने की आवश्यकता है।
भाषा शोभना वैभव
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