ठाणे, 20 मई (भाषा) महाराष्ट्र की एक अदालत ने 2007 के एक मामले में निलंबित आयकर अधिकारी और उनकी पत्नी को आय से अधिक संपत्ति के आरोप से बरी कर दिया है और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से ‘गलत’ और ‘लापरवाही से’ जांच के लिए नाखुशी जताई है।
उच्चतम न्यायालय के एक पूर्व फैसले का हवाला देते हुए, विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश डी.एस. देशमुख ने मंगलवार को कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी को उचित संदेह से परे बेगुनाही साबित करने की आवश्यकता नहीं है, और संभावना की प्रबलता ही पर्याप्त है।
अदालत ने महाराष्ट्र के ठाणे में तैनात आयकर अधिकारी अनिल रत्नाकर मल्लेल (45) और उनकी पत्नी सुवर्णा अनिल मल्लेल (43) को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धारा 109 (उकसाने) के तहत आरोपों से बरी कर दिया।
सीबीआई के भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी), मुंबई ने जनवरी 2007 में मामला दर्ज किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सितंबर 1991 और दिसंबर 2006 के बीच अनिल मल्लेल ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए अपने और अपने परिवार के नाम पर संपत्ति जमा की।
शुरुआती प्राथमिकी में आय से अधिक संपत्ति 15.34 लाख रुपये आंकी गई थी, लेकिन सीबीआई ने नवंबर 2008 में दायर अंतिम आरोपपत्र में इस आंकड़े को बढ़ाकर 28,57,984 रुपये दिखाया था।
भाषा तान्या वैभव
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