कराची, 26 अगस्त (भाषा) पाकिस्तान में रोबोट अब सिर्फ तकनीक का हिस्सा नहीं रह गए हैं, बल्कि रेस्तरां में ग्राहकों को खाना परोसने का काम भी करने लगे हैं। कराची, लाहौर और मुल्तान के कई रेस्तरां में स्थानीय स्टार्टअप द्वारा बनाए गए मानवनुमा रोबोट इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
मुल्तान स्थित स्टार्टअप ‘कोबोट’ के संस्थापक और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर सैयद उसामा अजीज का लक्ष्य पाकिस्तान के उपभोक्ता बाजार में मानवनुमा रोबोट के इस्तेमाल को लोकप्रिय बनाना है।
राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से स्नातक अजीज ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम हार्डवेयर, सर्किट बोर्ड और फाइबरग्लास बॉडी का इस्तेमाल कर स्थानीय स्तर पर रोबोट बनाते हैं। हम उनकी प्रोग्रामिंग भी करते हैं।’’
उन्होंने बताया कि ये रोबोट बैटरी से चलते हैं और इन्हें संचालित करना आसान है। किसी खास काम के लिए एक एप्लिकेशन डाउनलोड करनी होती है।
अजीज हाल में कराची आए थे, जहां उनके बनाए दो मानवनुमा रोबोट—‘राबिया’ और ‘जोजो’—एक लोकप्रिय रेस्तरां ‘द सिसिलियन’ में ग्राहकों को खाना परोस रहे हैं। इनके वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद रेस्तरां में ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ गई है।
सफेद गोलाकार सिर और विजर हेलमेट वाले ये रोबोट रेस्तरां में घूमते हुए पिज्जा, बर्गर और अन्य खाद्य पदार्थों से भरी ट्रे ग्राहकों की मेज तक पहुंचाते हैं।
रेस्तरां के संचालन प्रबंधक अली जैदी ने कहा कि खासकर कई ग्राहक अब इस अनुरोध के साथ आ रहे हैं कि उन्हें खाना ‘राबिया’ और ‘जोजो’ परोसें। उन्होंने कहा, ‘‘ग्राहक, खासकर बच्चे, रोबोट को खाना परोसते देखकर काफी उत्साहित होते हैं।’’
अजीज ने कहा कि पाकिस्तान में लोग अब यह समझने लगे हैं कि रोबोट का इस्तेमाल उपभोक्ता सेवाओं में सहायक के रूप में किया जा सकता है।
उन्होंने बताया, ‘‘हमने 2018 में मुल्तान के एक रेस्तरां में अपना पहला रोबोट पेश किया था, लेकिन तब यह विचार सफल नहीं हो पाया। हमारे रोबोट से जुड़ी कुछ समस्याएं थीं, जिन्हें दूर करने में हमें कई साल लगे।’’
समय के साथ स्थिति बदली है। अजीज का मानना है कि पाकिस्तान में मानवनुमा रोबोट के लिए काफी संभावनाएं हैं, हालांकि करीब 4,20,000 पाकिस्तानी रुपये खर्च कर रोबोट खरीदने के लिए लोगों को राजी करना अभी चुनौतीपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम फिलहाल शैक्षणिक संस्थानों और रेस्तरां को परीक्षण के आधार पर तथा रियायती दरों पर ये रोबोट उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि हमारा मानना है कि इन्हें सरल काम करने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है।’’
अजीज ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के आने से काफी मदद मिली है और इसका इस्तेमाल इन रोबोट की प्रोग्रामिंग में भी किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘फिलहाल रोबोट सिर्फ ट्रे को मेज तक ले जाने के लिए प्रोग्राम किए गए हैं और वेटर उनमें खाना रख देते हैं। लेकिन हम उन्हें इस तरह प्रोग्राम करने पर काम कर रहे हैं कि वे खुद ट्रे से खाना उठाकर ग्राहकों को परोस सकें।’’
भाषा
मनीषा वैभव
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