सैन जोस, 18 अप्रैल (एपी) अमेरिका से निवार्सित प्रवासियों का दूसरा समूह शुक्रवार को कोस्टा रिका पहुंचा, जिसमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। यह कदम उस समझौते के तहत उठाया गया है, जिसके जरिए कोस्टा रिका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की प्रवासियों को ‘‘तीसरे देशों’’ में भेजने की नीति में सहयोग कर रहा है।
मार्च में कोस्टा रिका के राष्ट्रपति रोड्रिगो चावेस और अमेरिका की विशेष दूत क्रिस्टी नोएम के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के अनुसार, कोस्टा रिका हर सप्ताह अमेरिका से निकाले गए अधिकतम 25 तीसरे देशों के नागरिकों को स्वीकार करेगा।
अमेरिका से निवार्सित 25 लोगों का पहला दल सैन जोस के जुआन सांतामारिया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचा था, जहां कोस्टा रिका की प्रवासन पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) के साथ मिलकर उनकी सहायता की।
शुक्रवार को पहुंचे दूसरे दल में कुल 30 लोग शामिल थे। इनमें आठ कोस्टा रिका के नागरिक, आठ ब्राजीलियाई, तीन रोमानियाई, दो चीनी नागरिक, तीन उज्बेकिस्तान से, दो अजरबैजान से, एक आयरलैंड से, एक भारत से, एक वियतनाम से और एक बेलारूस से हैं।
इन लोगों को भी आईओएम द्वारा संचालित असिस्टेड वॉलंटरी रिटर्न (एवीआर) कार्यक्रम के तहत अपने मूल देशों में लौटने का विकल्प दिया जाएगा। इसके अलावा वे मानवीय आधार पर कोस्टा रिका में कानूनी निवास के लिए आवेदन भी कर सकते हैं।
कोस्टा रिका उन देशों की बढ़ती सूची में शामिल है, जिन्होंने अमेरिका के साथ ऐसे विवादास्पद और अक्सर गोपनीय समझौते किए हैं। इनमें दक्षिण सूडान, होंडुरास, रवांडा, गुयाना तथा डोमिनिका और सेंट किट्स एंड नेविस जैसे कैरेबियाई देश भी शामिल हैं।
पहले दल में अल्बानिया, केन्या, मोरक्को, चीन, भारत और कैमरून के लोग भी शामिल थे, साथ ही ग्वाटेमाला और होंडुरास के नागरिक भी थे।
एपी गोला सुरभि
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