(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 17 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने शुक्रवार को कहा कि अंधविश्वास तब जन्म लेता है, जब शिक्षा प्रणाली अपने पाठ्यक्रम के माध्यम से किसी सभ्यता की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति को प्रभावी ढंग से संप्रेषित करने में विफल रहती है।
सैन फ्रांसिस्को में ‘ग्लोबल साइंस इनोवेशन फोरम’ द्वारा आयोजित एक संवाद सत्र में भाग लेते हुए होसबाले ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा प्रणाली के माध्यम से अतीत के वैज्ञानिक अनुसंधानों को फिर से जीवंत बनाकर व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाया जाना बेहद आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “हमारी परंपरा में वैज्ञानिक अनुसंधान और आध्यात्मिकता दो अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि वे गहराई से परस्पर जुड़े हुए हैं।”
होसबाले ने कहा कि एक समय ऐसा था जब दुनिया में धर्म और विज्ञान को परस्पर विरोधी माना जाता था, लेकिन भारतीय सभ्यतागत परंपरा में वही लोग और वही समूह वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ आध्यात्मिक साधना में भी सक्रिय रहते थे।
आरएसएस नेता ने कहा, “यह बौद्धिक परंपरा लंबे समय से हमारी सभ्यतागत विरासत का हिस्सा रही है।’’
उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था में भी इस पृष्ठभूमि का प्रतिबिंब होना चाहिए।
होसबाले ने कहा कि प्राचीन व्यवस्था नैतिक और वैज्ञानिक-दोनों दृष्टियों से सुदृढ़ थी और उसमें सुरक्षा, आजीविका तथा दैनिक जीवन के व्यावहारिक पहलुओं का ध्यान रखा जाता था।
आरएसएस नेता ने कहा, ‘‘यदि हम मानवता और नागरिकों के लिए अधिक सशक्त अवसर सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो यह सब शिक्षा के माध्यम से ही संभव है। जब शिक्षा ठहर जाती है और तकनीक आगे बढ़ती है, तो समाज में असमानता बढ़ने लगती है। जब समाज का कोई हिस्सा शिक्षा या वैज्ञानिक प्रगति में पीछे रह जाता है, तो असमानता और गहरी हो जाती है। आर्थिक विकास, शिक्षा और जीवन की गुणवत्ता-ये सभी एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।”
होसबाले ने कहा, “इसीलिए आज सरकारों को इस विषय को बेहद गंभीरता से लेना होगा। एक ओर हमें समाज में मौजूद असमानताओं, पूर्वाग्रहों और अंधविश्वासों का समाधान करना है, तो दूसरी ओर विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रगति को निरंतर आगे बढ़ाना भी जरूरी है। यदि शिक्षा प्रणाली इन बातों को स्पष्ट रूप से नहीं समझा पाती, तो अतीत के वैज्ञानिक अनुसंधानों को भी अंधविश्वास मानकर खारिज किया जा सकता है।”
होसबाले ने कहा कि शिक्षा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह लोगों को वास्तविक वैज्ञानिक अनुसंधान और अंधविश्वास के बीच अंतर करना सिखाए।
भाषा खारी नेत्रपाल
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