Sergey Lavrov on India: ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक से ठीक पहले रूस की ओर से भारत के लिए बड़ा संदेश आया है। सर्गेई लावरोव ने भारत को ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भरोसा दिलाते हुए कहा है कि पश्चिमी देशों के दबाव या प्रतिस्पर्धा का भारत-रूस ऊर्जा व्यापार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एक विशेष इंटरव्यू में लावरोव ने साफ शब्दों में कहा कि रूस अपने सहयोगियों के साथ किए गए समझौतों का सम्मान करता है और भारत के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
Sergey Lavrov India energy security: लावरोव ने क्या कहा ?
लावरोव ने इस दौरान अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। उनके मुताबिक, वाशिंगटन की रणनीति सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उन देशों पर भी दबाव बना रहा है जो रूस के साथ तेल और गैस का कारोबार कर रहे हैं। लावरोव ने कहा कि अमेरिका की मंशा साफ है-वह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन पर कब्जा चाहता है।
रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत जैसे बड़े और रणनीतिक देश इस भू-राजनीतिक खेल को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है और बाहरी दबाव में नहीं आता। उन्होंने यह भी कहा कि रूस हर परिस्थिति में यह सुनिश्चित करेगा कि पश्चिमी देशों के कदमों से भारत-रूस ऊर्जा समझौतों पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
BRICS foreign ministers meeting 2026: यूरोपीय देशों की नीतियों पर भी सवाल उठाए?
लावरोव ने यूरोपीय देशों की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि रूसी ऊर्जा से दूरी बनाना किसी बाजार मजबूरी का नतीजा नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक फैसला है। उन्होंने दावा किया कि कई पश्चिमी देशों ने सिर्फ रूस को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से तेल और गैस पर प्रतिबंध लगाए, लेकिन इसका उल्टा असर खुद उनकी अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि यूरोप ने रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम करने की कोशिश में खुद को आर्थिक संकट में धकेल दिया है। अब कई यूरोपीय देशों को मजबूरी में अमेरिका से महंगी लिक्विफाइड नेचुरल गैस खरीदनी पड़ रही है। लावरोव के अनुसार, इससे वहां ऊर्जा कीमतें बढ़ी हैं और उद्योगों पर दबाव बढ़ा है।
होर्मुज को लेकर भी दिया बयान ?
होर्मुज जलडमरूमध्य की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा का असर सबसे ज्यादा यूरोप पर पड़ सकता है। साथ ही खाद्य संकट और महंगाई जैसी समस्याएं भी गहरा सकती हैं।
दूसरी ओर, भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि ऊर्जा खरीद के मामले में उसकी प्राथमिकता केवल राष्ट्रीय हित है। भारत का रुख साफ है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने, नागरिकों को सस्ती आपूर्ति उपलब्ध कराने और आर्थिक विकास बनाए रखने के लिए जहां से बेहतर विकल्प मिलेगा, वहां से खरीद की जाएगी।