(फाकिर हसन)
जोहानिसबर्ग, तीन सितंबर (भाषा) दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने भारत में अपने उच्चायुक्त अनिल सूकलाल को प्रोटोकॉल के किसी भी उल्लंघन के आरोप से मुक्त कर दिया है।
सूकलाल के भारत में एक मंदिर में पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा और भारतीय मूल के एक ऐसे कारोबारी के साथ जाने पर विवाद खड़ा हो गया था, जिस पर दक्षिण अफ्रीका में भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध और सहयोग विभाग (डीआईआरसीओ) ने बुधवार को कहा कि पूर्व राष्ट्राध्यक्षों की निजी यात्राओं को लेकर सरकार का रुख यही है कि उच्चायोग उनकी मदद कर सकता है लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वह व्यक्ति ‘‘सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से काम कर रहा है या सरकार के हितों का प्रतिनिधित्व’’ कर रहा है।
इसने कहा, ‘‘डीआईआरसीओ ने एक ऐसी व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है, जिससे सरकार यह सुनिश्चित कर सके कि इस तरह की गतिविधियों या मुलाकातों का प्रतिष्ठा, राजनीतिक, राजनयिक या सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों के लिए आकलन किया जाए।’’
डीआईआरसीओ ने एक बयान में कहा कि उसने सूकलाल के साथ अपनी आंतरिक विचार-विमर्श प्रक्रिया पूरी कर ली है।
विभाग ने स्पष्ट किया कि राजदूत ने पूर्व राष्ट्रपति को प्रोटोकॉल के तहत सहायता प्रदान की थी और जुमा तथा कारोबारी अजय गुप्ता के बीच किसी भी औपचारिक मुलाकात की व्यवस्था नहीं कराई थी।
सूकलाल को इससे पहले ‘‘विचार-विमर्श’’ के लिए वापस बुलाया गया था। उनके भारत में अपने पद पर लौटने की खबर है।
उन्हें वापस बुलाये जाने का कदम तब उठाया गया था जब जुमा और सूकलाल की हरिद्वार के एक मंदिर में जून में विवादित कारोबारी अजय गुप्ता से मुलाकात की तस्वीरें सामने आई थीं।
गुप्ता 2018 में अपने भाइयों अनिल और राजेश के साथ 2018 दक्षिण अफ्रीका से भाग गए थे। यह घटना जुमा को उनकी अपनी पार्टी ‘अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस’ (एएनसी) द्वारा पद से हटाए जाने की पूर्व संध्या पर हुई थी। जुमा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।
भाषा
देवेंद्र वैभव
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