सियोल, 21 जनवरी (एपी)
दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाया कि तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक योल द्वारा 2024 में लागू किया गया मार्शल लॉ विद्रोह की श्रेणी में आता है। अदालत ने इस मामले में संलिप्तता के लिए यून के समय देश के प्रधानमंत्री रहे हान डक-सू को 23 साल की कारावास की सजा सुनाई।
पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू, यून सरकार के पहले अधिकारी बन गए हैं, जिन्हें दिसंबर 2024 में राष्ट्रपति यून द्वारा लगाए गए मार्शल लॉ से जुड़े विद्रोह के आरोपों में दोषी ठहराया गया। इस फैसले से राष्ट्रपति यून और उनके अन्य सहयोगियों के खिलाफ आने वाले फैसलों की दिशा तय होने की उम्मीद है। यून भी विद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
यून द्वारा प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए हान दक्षिण कोरिया के दूसरे सबसे बड़े पद पर थे। मार्शल लॉ संकट के दौरान वह तीन कार्यवाहक नेताओं में से एक के रूप में काम कर रहे थे। इसी संकट के कारण राष्ट्रपति यून पर महाभियोग लगा और अंततः उन्हें पद से हटा दिया गया।
दक्षिण कोरिया में विद्रोह सबसे गंभीर अपराधों में से एक माना जाता है। हाल ही में स्वतंत्र जांच अधिवक्ता ने राष्ट्रपति यून के लिए मृत्युदंड का अनुरोध किया था। यून पर विद्रोह की साजिश रचने का आरोप है। सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट 19 फरवरी को राष्ट्रपति यून के खिलाफ विद्रोह के आरोपों पर फैसला सुनाएगा।
बुधवार को टीवी पर प्रसारित कार्यवाही के अनुसार, सियोल की अदालत ने अपने फैसले में तय किया कि यून का मार्शल लॉ का आदेश बगावत के बराबर है, और संसद एवं चुनाव कार्यालयों में सैनिकों तथा पुलिस अधिकारियों को भेजने को “दंगा” या “खुद से तख्तापलट” माना, जिसका मकसद संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करना था और यह इलाके में स्थिरता को बिगाड़ने के लिए काफी गंभीर था।
अदालत ने यून के मार्शल लॉ के आदेश को कैबिनेट परिषद की बैठक में पारित कराके लागू करने में प्रक्रियात्मक वैधता प्रदान करने की कोशिश करके उनके विद्रोह में अहम भूमिका निभाने के लिए हान को सजा सुनाई।
हान बुधवार के फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं। हान ने बार-बार कहा है कि वह यून को बता चुके थे कि वह उनकी मार्शल लॉ की योजना का विरोध करते हैं। उन्होंने अन्य कई आरोपों को खारिज कर दिया है।
एपी
एपी अमित मनीषा
मनीषा
2101 1442
नननन वैभव सुरेश
सुरेश