श्रीलंका पश्चिम एशिया संघर्ष से सर्वाधिक प्रभावित हुए एशिया-प्रशांत के देशों में शामिल:संरा रिपोर्ट

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श्रीलंका पश्चिम एशिया संघर्ष से सर्वाधिक प्रभावित हुए एशिया-प्रशांत के देशों में शामिल:संरा रिपोर्ट

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  • Publish Date - April 17, 2026 / 02:32 PM IST,
    Updated On - April 17, 2026 / 02:32 PM IST

कोलंबो, 17 अप्रैल (भाषा) श्रीलंका पश्चिम एशिया संकट के कारण एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की ओर से प्रकाशित यह रिपोर्ट बृहस्पतिवार को जारी की गई। इसमें इस बात का प्रारंभिक आकलन किया गया है कि जारी संघर्ष वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और वित्तीय तंत्र को किस तरह अस्थिर कर रहा है।

‘पश्चिम एशिया में सैन्य वृद्धि: एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र में मानव विकास पर प्रभाव’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका पर पश्चिम एशिया के संकट का अत्यधिक असर पड़ने की आशंका है क्योंकि 2025 में काम करने के लिए श्रीलंका से विदेश जाने वाले 80.2 प्रतिशत श्रमिक पश्चिम एशियाई देशों में गए थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंका, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है।

इसमें कहा गया कि पर्यटकों के आगमन की संख्या भी इस साल फरवरी में प्रतिदिन औसतन 9,976 से घटकर एक मार्च से आठ मार्च के दौरान प्रतिदिन 5,956 रह गई जो लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंका को बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान जैसे अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसियों की तरह खाड़ी क्षेत्र के साथ निर्यात संबंध कमजोर होने से आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इससे कृषि आय घट सकती है, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति तक पहुंच सीमित हो सकती है और उत्पादन ठप पड़ सकता है।

चाय निर्यात में अनुमानित नुकसान एक करोड़ से 1.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर प्रति सप्ताह आंका गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार उत्पादन में नुकसान करीब 97 अरब अमेरिकी डॉलर से 299 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच हो सकता है, जो इस क्षेत्र के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 0.3 से 0.8 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘आकलन में शामिल 14 देशों के करीब 88 लाख लोगों के गरीबी की चपेट में आने का जोखिम है।’’

भाषा

सिम्मी संतोष

संतोष