संघीय एजेंसियों के कदम न उठाने पर भी राज्य नहीं कर सकेंगे उपभोक्ता सुरक्षा की कार्रवाई: न्यायालय

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संघीय एजेंसियों के कदम न उठाने पर भी राज्य नहीं कर सकेंगे उपभोक्ता सुरक्षा की कार्रवाई: न्यायालय

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  • Publish Date - July 6, 2026 / 03:46 PM IST,
    Updated On - July 6, 2026 / 03:46 PM IST

(सारा जे. मोराथ, वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी)

वाशिंगटन, छह जुलाई (द कन्वरसेशन) रसायन बनाने वाली बड़ी कंपनी मोनसेंटो का वर्षों से यह तर्क रहा है कि अगर अमेरिकी ‘पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी’ (ईपीए) कैंसर की चेतावनी के बिना किसी कीटनाशक के लेबल को मंज़ूरी देती है, तो राज्य कैंसर के जोखिमों के बारे में उपभोक्ताओं को चेतावनी न देने के लिए अदालत में इसके निर्माता को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते।

अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने 25 जून, 2026 को जारी एक फ़ैसले में सहमति जताई, हालांकि कांग्रेस के कुछ सदस्य उस फ़ैसले को पलटने के लिए कदम उठा रहे हैं।

वर्ष 2009 से 2019 के बीच, ईपीए ने बार-बार यह निष्कर्ष निकाला कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ग्लाइफोसेट से इंसानों में कैंसर होता है। इसलिए, एजेंसी ने ग्लाइफोसेट-आधारित खरपतवार नाशकों -जिनमें मोनसेंटो का ‘राउंडअप’ भी शामिल है- को बिना कैंसर चेतावनी वाले लेबल के बाज़ार में बने रहने की अनुमति दी है।

ऐसा तब है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की शाखा ‘इंटरनेशनल एजेंसी फ़ॉर रिसर्च ऑन कैंसर’ की 2015 की एक रिपोर्ट में ग्लाइफ़ोसेट को ‘‘इंसानों के लिए संभवतः कैंसर पैदा करने वाला’’ बताया गया था। यह रिपोर्ट असल ज़िंदगी में इसके संपर्क में आने से इंसानों में कैंसर होने के ‘‘सीमित’’ साक्ष्यों और परीक्षण में शामिल जानवरों में कैंसर होने के ‘‘पर्याप्त’’ सबूतों के आधार पर तैयार की गई थी। वर्ष 2025 के एक अध्ययन में भी प्रयोगशाला के चूहों पर ऐसे ही नतीजे देखने को मिले।

अमेरिका में कई मुकदमों में 2015 की रिपोर्ट का इस्तेमाल करके यह साबित किया गया कि मोनसेंटो ने रसायन संबंधी खतरों के बारे में चेतावनी नहीं दी थी। इनमें से एक शुरुआती मामला, ‘हार्डमैन बनाम मोनसेंटो कंपनी’ था, जिसमें 2019 में मोनसेंटो के खिलाफ़ आठ करोड़ अमेरिकी डॉलर का फ़ैसला सुनाया गया।

जूरी ने पाया कि कैलिफ़ोर्निया के रहने वाले एडविन हार्डमैन, जिन्होंने अपने यहां खरपतवार नाशक का इस्तेमाल किया था, यह साबित कर पाए कि ‘राउंडअप’ की वजह से उन्हें कैंसर हुआ था और मोनसेंटो अपने उत्पाद से जुड़े खतरों के बारे में ग्राहकों को चेतावनी देने में नाकाम रही। अपील में इस फ़ैसले को बरकरार रखा गया।

मोनसेंटो का मालिकाना हक अब जर्मनी की बड़ी केमिकल कंपनी बायर के पास है।

इसके बाद के वर्षों में, मोनसेंटो ने उन लोगों के लगभग 1,00,000 दावों को निपटाने के लिए 10 अरब डॉलर से ज़्यादा का भुगतान किया है, जिनका कहना था कि ‘राउंडअप’ के संपर्क में आने से उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा, लेकिन मोनसेंटो का अब भी यही कहना है- और उच्चतम न्यायालय भी इससे सहमत है- कि 1947 में बना और 1972 में व्यापक रूप से संशोधित ‘फ़ेडरल इंसेक्टिसाइड, फंगीसाइड, एंड रोडेंटिसाइड एक्ट’ राज्यों को ऐसी कोई भी लेबलिंग शर्त लगाने से रोकता है, जो संघीय सरकार द्वारा मंज़ूर नहीं है। इसका मतलब है कि राज्य की अदालतें कंपनी को ऐसी चेतावनी न देने के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकतीं, जिसकी ज़रूरत यूएस ईपीए को नहीं है।

पर्यावरण और खाद्य कानूनों के जानकार के तौर पर, मैं कह सकता हूं कि इस मामले में उच्चतम न्यायालय का फ़ैसला उन हज़ारों मुकदमों को प्रभावी ढंग से रोक देगा, जिनमें यह आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने ग्राहकों को ग्लाइफोसेट से होने वाले संभावित खतरों के बारे में चेतावनी नहीं दी। इससे दूसरे कीटनाशक बनाने वाली कंपनियों के ख़िलाफ़ इसी तरह के मुकदमों में भी मुश्किलें खड़ी होंगी।

द कन्वरसेशन नेत्रपाल सुरेश

सुरेश