आतंकी कृत्यों के नतीजे भुगतने होंगे : जयशंकर ने आसियान क्षेत्रीय मंच में कहा

Ads

आतंकी कृत्यों के नतीजे भुगतने होंगे : जयशंकर ने आसियान क्षेत्रीय मंच में कहा

  •  
  • Publish Date - July 23, 2026 / 09:23 PM IST,
    Updated On - July 23, 2026 / 09:23 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

मनीला, 23 जुलाई (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं की नीति पर अडिग रहते हुए चेतावनी दी कि आतंकी कृत्यों के ‘नतीजे भुगतने होंगे’।

जयशंकर फिलीपीन की राजधानी मनीला में 33वीं आसियान क्षेत्रीय मंच (एआरएफ)की मंत्री-स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने इसी के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने के लिए इस मंच के महत्व को रेखांकित किया।

विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अपने भाषण की मुख्य बातें बताते हुए कहा, ‘‘आतंकवाद के कतई बर्दाश्त नहीं की नीति होनी चाहिए। साथ ही, इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने वालों को नतीजे भुगतने होंगे।’’

जयशंकर ने आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘भारत, एडीएमएम प्लस(आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस) में मलेशिया के साथ मिलकर विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता करता है और सर्वोत्तम तौर-तरीकों का संकलन तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभाता है।’’

जयशंकर ने रेखांकित किया कि समुद्री जहाजों और आम लोगों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचों पर हमले ‘अस्वीकार्य’ हैं, और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से होने वाला व्यापार ‘‘सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के’’ जारी रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन लोगों से सावधान रहना चाहिए जो परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने और निरस्त्रीकरण की कोशिशों को कमजोर करते हैं।

विदेश मंत्री ने ‘मनीला कार्ययोजना’ का स्वागत किया, जो आने वाले दशक में एआरएफ की गतिविधियों के लिए एक मार्गदर्शक ढांचे का काम करेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि इसके पांच आधार हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत के नजरिए के अनुरूप हैं।

आपदा राहत के मामले में भारत के मिल-जुलकर काम करने के तरीके को रेखांकित करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत सबसे अच्छे तौर-तरीके साझा करता है, काम करने के लिए आम मानक प्रक्रियाएं बनाता है और वास्तविक समय व टेबलटॉप अभ्यास करता है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन का समर्थन करता है, नियमित रूप से अस्थायी अस्पताल की सुविधा देता है, खोज और बचाव कार्य करता है, राहत सामग्री और चिकित्सा आपूर्ति भेजता है।

जयशंकर ने कहा कि हाल ही में भारत ने श्रीलंका, फिलीपीन और जमैका में आए चक्रवात से लेकर म्यांमा, वेनेजुएला और अफगानिस्तान में आए भूकंप तक के मामलों में राहत और पुनर्वास का काम किया है।

समुद्री सुरक्षा के बारे में उन्होंने बताया कि भारत में ‘इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर’, क्वाड की ‘ हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र जागरूकता’ पहल और उत्तरी अरब सागर से लेकर पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र तक भारतीय सेना की तैनाती जैसे कदम समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ समुद्री डकैती, तस्करी और नशीले पदार्थों के व्यापार को रोकने में ‘अहम योगदान’ दे रहे हैं।

उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति ज़िम्मेदार और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने, तथा साइबर अपराधों और अन्य मुद्दों पर गहरे सहयोग की भी वकालत की।

दक्षिण चीन सागर के बारे में उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे ‘‘ठोस, असरदार और कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता’’ की उम्मीद करता है जो 1982 में अपनाए गए ‘समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि’ (यूएनसीएलओएस) का पूरी तरह पालन करता हो और जिससे ‘‘सभी इस्तेमाल करने वालों के जायज़ अधिकारों पर कोई असर न पड़े’’।

जयशंकर दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (आसियान) और ‘क्वाड’ के तहत उच्च-स्तरीय चर्चाओं में हिस्सा लेने के लिए मनीला में हैं।

भाषा धीरज रंजन

रंजन

रंजन