(माइक जेफ्रीज, नॉर्थम्ब्रिया विश्वविद्यालय द्वारा)
लंदन, 28 मार्च (द कन्वरसेशन) मनुष्य ने हमेशा से ही प्राकृतिक दुनिया की कल्पना की है। हिमयुग की गुफा चित्रकला से लेकर आधुनिक युग तक, हम उन जानवरों और परिदृश्यों को चित्रित करते हैं, जिन्हें हम महत्व देते हैं – और जिन्हें हम महत्व नहीं देते, उन्हें अनदेखा कर देते हैं।
अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हमारे लिए कल्पना का काम कर रही है। और जब उससे “रीवाइल्डेड” (यानी फिर से प्राकृतिक/जंगली बनाए गए) ब्रिटेन की तस्वीर सोचने को कहा जाता है-, तो यह ऐसे परिदृश्य प्रस्तुत करती है, जो आश्चर्यजनक रूप से समान और शांत होते हैं।
एबरडीन विश्वविद्यालय के दो भूगोलवेत्ताओं ने हाल में ठीक यही किया। अपने शोध में, उन्होंने ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किए हैं कि कैसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले एआई चैटबॉट (जेमिनी, चैटजीपीटी और अन्य) ने ब्रिटेन में पुनर्स्थापित भूदृश्यों की छवियां तैयार कीं।
लेखक मानते हैं कि ये आदेश बहुत सामान्य हैं, लेकिन इससे ‘बॉट्स’ को मनमानी करने की छूट मिल जाती है। फिर उत्पन्न छवियों की तुलना संरचना (उदाहरण के लिए, दृष्टिकोण, पैमाना, प्रकाश व्यवस्था) और विषयवस्तु (चित्र में क्या है और क्या नहीं है, मुख्य रूप से आवास के प्रकार, प्रजातियां या मनुष्य) दोनों का उपयोग करके की गई।
‘बॉट्स’ ऐसे सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन होते हैं, जिन्हें इंटरनेट पर स्वचालित रूप से पूर्व-निर्धारित कार्य करने के लिए तैयार किया जाता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा पुनर्निर्मित सभी भूदृश्य लगभग एक जैसे थे, जिनमें से एक को छोड़कर बाकी सभी में दूर की पहाड़ियां दिखाई दे रही थीं, जो धीरे-धीरे खुले घास के मैदान या बंजर भूमि में परिवर्तित होती थीं, जहां एक धारा या तालाब दिखाई देता था। वहां न तो गंदगी थी, न सड़न, न ही ऐसे जानवर जिन्हें देखकर किसी को हैरानी हो।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता वास्तव में पारिस्थितिक रूप से सटीक वनीकरण की छवियां उत्पन्न कर सकती है। उदाहरण के लिए, जेमिनी से बनाई गई यह छवि, एक वास्तविक रूप से वनीकरण किए गए ब्रिटिश परिदृश्य की अव्यवस्था को दर्शाती है।
हालांकि, यह ऐसा तभी करता है, जब इसे प्रजातियों, भूदृश्यों, आवास प्रकारों आदि के बारे में अत्यंत विशिष्ट निर्देश दिए जाते हैं। दूसरे शब्दों में, किसी प्राकृतिक परिदृश्य की वास्तविक छवि प्राप्त करने के लिए आपको यह जानना आवश्यक है कि वह परिदृश्य वास्तव में कैसा दिखना चाहिए।
हाल में हुए अध्ययन में सामने आए स्वच्छ एआई परिदृश्य आश्चर्यजनक नहीं हैं। एबरडीन के शोधकर्ताओं का कहना है कि ये मॉडल उपलब्ध स्रोतों से प्रेरणा लेते हैं, जिनमें सोशल मीडिया और पर्यावरण संबंधी पहल और गैर-सरकारी संगठनों की वेबसाइट शामिल हैं, जो वन्य जीवन को बढ़ावा देते हैं।
कृत्रिम रूप से निर्मित परिदृश्यों में भव्यता का स्पर्श है, निश्चित रूप से ऊपर से देखने पर यह दृश्य और भी मनमोहक लगता है।
प्रकृति संरक्षण परियोजनाओं, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में, की आलोचना की जाती है: सड़कों के किनारे घास काटे नहीं जाते, फुटपाथों पर खरपतवार उग आते हैं, और पार्कों की साफ-सफाई ठीक से नहीं की जाती। कुछ शोधकर्ता इसे सौंदर्य संबंधी प्रतिक्रिया कहते हैं।
एआई द्वारा निर्मित वन्य परिदृश्य काफी हद तक झाड़ियों से रहित हैं, जो कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि एआई द्वारा उपयोग किए गए छवि स्रोतों में झाड़ियां बहुत कम मात्रा में मौजूद हैं।
वास्तविक दुनिया में परियोजनाओं के लिए यह एक जोखिम है। यदि जनता प्रकृति के संरक्षण को सुव्यवस्थित और सुंदर रूप में देखने की अपेक्षा करने लगे, तो अव्यवस्थित वास्तविकता को स्वीकार करना कठिन हो सकता है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने एक बेहद शांत प्राकृतिक वातावरण तैयार किया है।
(द कन्वरसेशन) देवेंद्र दिलीप
दिलीप