न्यूयॉर्क, 18 जनवरी (एपी) अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर चल रहे विवाद से पहले भी दोनों के रिश्ते कई मौकों पर तनावपूर्ण रहे हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से लेकर आज तक कई बार ट्रांस-एटलांटिक कूटनीतिक मुद्दे सामने आए हैं, जब अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच गहरे मतभेद उभर आए।
वर्ष 1956 में जब फ्रांस, ब्रिटेन और इज़राइल ने मिस्र के राष्ट्रपति जमाल अब्दुल नासिर को सत्ता से हटाने और स्वेज नहर पर फिर से नियंत्रण हासिल करने के उद्देश्य से मिस्र पर हमला किया, तो अमेरिका ने इसे रोकने के लिए कड़े कूटनीतिक और आर्थिक दबाव का इस्तेमाल किया।
वियतनाम युद्ध के दौरान फ्रांस को छोड़कर यूरोप के अधिकतर देशों ने अमेरिका को कूटनीतिक समर्थन दिया, लेकिन सैनिक सेवा देने से इनकार किया। यूरोप में युद्ध के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों ने स्थानीय सरकारों को जटिल स्थिति में डाल दिया और ट्रांस-एटलांटिक रिश्तों पर इसका राजनीतिक असर पड़ा।
यूरोमिसाइल संकट 1980 के दशक में हुआ जब रूस द्वारा पश्चिमी यूरोप पर लक्षित किए जा सकने वाले नए एसएस-20 मिसाइलों को तैनात करने के बाद, नाटो ने अमेरिकन पर्शिंग बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों को यूरोप में तैनात करने का निर्णय लिया। इससे महाद्वीप में एक बार फिर व्यापक विरोध और बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का दौर चला, जिसने अमेरिका-यूरोप संबंधों पर दबाव डाला।
अमेरिका द्वारा इराक पर 2003 में किए गए आक्रमण ने यूरोप, खासकर फ्रांस और जर्मनी, के साथ एक बड़ा राजनीतिक संकट पैदा किया, क्योंकि इन देशों ने सद्दाम हुसैन की सरकार पर हमला करने का समर्थन नहीं किया। अमेरिकी अधिकारियों ने उन्हें “ओल्ड यूरोप” कहकर आलोचना की और पूर्वी यूरोपीय देशों को “न्यू यूरोप” कहकर समर्थन जताया।
“आतंकवाद के खिलाफ युद्ध” के तहत अमेरिका ने संदिग्धों को हिरासत में लेकर उन देशों में भेजा, जहां उन्हें बड़े पैमाने पर पूछताछ और यातना का सामना करना पड़ा। हालांकि, कुछ यूरोपीय सरकारें इस कार्यक्रम में भागीदार रहीं। जनता में भारी आलोचना ने नेताओं को इसकी निंदा करने पर मजबूर किया।
तीन साल पहले रूस यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ और जब जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में लौटे, तो उन्होंने रूस के यूक्रेन आक्रमण के खिलाफ तीन साल की अमेरिकी नीति को उलट दिया। ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति गर्मजोशी दिखाई, यूक्रेन को सैन्य सहायता कम कर दी और यूरोपीय नेताओं को चिंतित कर दिया, जो यूक्रेन को अपनी सुरक्षा की रीढ़ मानते हैं।
ट्रम्प प्रशासन द्वारा दिसंबर 2025 में जारी नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति ने यूरोपीय सहयोगियों का वर्णन “कमजोर” के रूप में किया, उनकी प्रवास और अभिव्यक्ति-स्वतंत्रता नीतियों की खुलकर आलोचना की और लंबे समय तक भरोसेमंद साझेदार होने पर शंका जताई।
फिर व्यापार टैरिफ का विवाद उठा। व्यापारिक संबंधों में तनाव तब बढ़ा, जब जुलाई 2025 में ट्रंप ने यूरोपीय संघ (ईयू) पर 30 प्रतिशत भारी टैरिफ लगाए जाने की घोषणा की। बाद में दोनों पक्षों ने अधिकतर वस्तुओं पर 15 प्रतिशत टैरिफ की रूपरेखा पर सहमति जताई, लेकिन यह मामला अमेरिका-यूरोप के बीच निरंतर तनाव का प्रतीक बना रहा।
ये घटनाएं दर्शाती हैं कि अमेरिका और यूरोप के मित्र देशों के बीच पहले भी गहरे मतभेद उभर आए हैं, खासकर नीतिगत प्राथमिकताओं और वैश्विक सुरक्षा तथा आर्थिक मोर्चों पर।
एपी मनीषा दिलीप
दिलीप