अमेरिका के सहयोगी देशों ने नये खतरों का सामना करने के लिए वैश्विक एकता की अपील की

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अमेरिका के सहयोगी देशों ने नये खतरों का सामना करने के लिए वैश्विक एकता की अपील की

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  • Publish Date - May 31, 2026 / 03:14 PM IST,
    Updated On - May 31, 2026 / 03:14 PM IST

सिंगापुर, 31 मई (एपी) अमेरिका के सहयोगी देशों ने रविवार को सिंगापुर में एक शीर्ष रक्षा सम्मेलन में एकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जैसे-जैसे खतरा क्षेत्रों की सीमाओं को पार कर रहा है, पारस्परिक सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है भले ही वाशिंगटन अपने पारंपरिक मित्र देशों के प्रति अधिक सख्त रुख अपना रहा हो।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एक दिन पहले ही, अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने शांगरी-ला सम्मेलन में पश्चिमी यूरोपीय सहयोगियों को रक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं देने के लिए फिर से फटकार लगाई थी जिसके बाद सहयोगी देशों की ये टिप्पणियां सामने आई हैं।

जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति हेगसेथ की प्रतिबद्धता की सराहना की लेकिन साथ ही वैश्विक स्तर पर मजबूत गठबंधनों की निरंतर आवश्यकता पर भी बल दिया।

अंतरराष्ट्रीय सामरिक अध्ययन संस्थान द्वारा आयोजित सम्मेलन में उन्होंने कहा, ‘‘विभाजन प्रतिरोध को कमजोर करता है, एकता प्रतिरोध को मजबूत करती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर अमेरिका, यूरोप और सहयोगी देशों तथा समान विचारधारा वाले देशों के बीच मतभेद पैदा होते हैं तो निश्चित रूप से ऐसी ताकतें इसका फायदा उठाएंगी। हमें ऐसी स्थिति को रोकना होगा। हमें अपना सहयोग जारी रखना होगा। अब समय आ गया है कि हम अपने सहयोग को और भी मजबूत बनाएं।’’

चीन तेजी से अपनी सेना का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रहा है, वहीं जापान भी अपनी रक्षा नीति में बदलाव ला रहा है। पिछले महीने, जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के मंत्रिमंडल ने घातक हथियारों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया, जो युद्ध के बाद की उसकी शांतिवादी नीति में एक बड़ा बदलाव है।

चीन ने इस बदलाव की आलोचना की। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन ‘‘जापान के नए प्रकार के सैन्यवाद की ओर बेधड़क बढ़ते कदमों का मजबूती से विरोध करेगा।’’

कोइज़ुमी ने चीन की ओर से लगाए गए इस आरोप को हास्यास्पद बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘जरा सोचिए एक देश के पास परमाणु हथियारों और सामरिक बमवर्षक का विशाल भंडार है। जापान के पास इनमें से कोई भी हथियार नहीं है, फिर भी जापान को नव सैन्यवाद का देश कहा जा रहा है। क्या यह अजीब नहीं है?’’

उन्होंने कहा कि पारदर्शिता ‘‘चर्चा और संवाद’’ से आती है। उन्होंने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि चीन ने अपने रक्षा मंत्री को सम्मेलन में नहीं भेजा।

शनिवार को अपने संबोधन में हेगसेथ ने रक्षा खर्च बढ़ाने के प्रयासों के लिए कई एशियाई साझेदारों की सराहना की साथ ही यूरोपीय सहयोगियों की फिर से आलोचना की।

उन्होंने कहा कि यूरोपीय सहयोगी ‘‘नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के बारे में खोखले वैश्विकवादी बयानबाजी में उलझ गए हैं जबकि यूरोपीय देशों ने अपनी सीमाएं खोल दीं और अपनी सेनाओं को खोखला कर दिया।’’

हेगसेथ ने कहा, ‘‘आप जितने चाहें उतने नियम बना सकते हैं और नियम अच्छी बात हैं। लेकिन यदि आपके पास उन्हें लागू कराने की ठोस सैन्य शक्ति नहीं है, तो वे नियम उस कागज के भी लायक नहीं हैं जिस पर वे लिखे गए हैं।’’

रविवार को सम्मेलन से इतर पत्रकारों से बातचीत में ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने कहा कि वह हेगसेथ के इस बयान से सहमत हैं कि ‘‘नियम-आधारित व्यवस्था को शक्ति का आधार मिलना चाहिए।’’ साथ ही, उन्होंने कहा कि सख्त नियम ‘‘आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।’’

उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र की रक्षा के लिए गठबंधन महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह एक सामूहिक चुनौती है और इसके लिए सामूहिक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है जो वास्तव में नियम-आधारित व्यवस्था का सार है।’’

नीदरलैंड की रक्षा मंत्री दिलन येसिलगोज-जेगेरियस ने कहा कि मौजूदा संघर्षों के वैश्विक निहितार्थ हैं और इनके लिए एक साझा प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘यूरोप में युद्ध में ईरान के ड्रोन, उत्तर कोरिया के सैनिक और गोला-बारूद और चीन से विभिन्न प्रकार का समर्थन शामिल है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सबक स्पष्ट है: क्षेत्रीय तनाव अब क्षेत्रीय नहीं रह गए हैं। हमारी सुरक्षा परस्पर जुड़ी हुई है।’’

एपी सुरभि सुभाष

सुभाष