अमेरिका के उपराष्ट्रपति वेंस, ईरानी संसद के अध्यक्ष गालिबफ शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचे

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अमेरिका के उपराष्ट्रपति वेंस, ईरानी संसद के अध्यक्ष गालिबफ शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचे

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  • Publish Date - April 11, 2026 / 05:29 PM IST,
    Updated On - April 11, 2026 / 05:29 PM IST

(सज्जाद हुसैन)

इस्लामाबाद, 11 अप्रैल (भाषा) अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ महत्वपूर्ण शांति वार्ता के लिए शनिवार को पाकिस्तान पहुंचे।

इस वार्ता का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक स्थायी शांति समझौते पर पहुंचना है। इस युद्ध ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को पंगु बना दिया है और व्यापक पैमाने पर आर्थिक व्यवधान पैदा किए हैं।

वेंस विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर समेत अमेरिका के कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस्लामाबाद पहुंचे। वह गालिबफ के नेतृत्व वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान की राजधानी पहुंचने के कुछ घंटे बाद यहां पहुंचे।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल में गालिबफ के अलावा विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सर्वोच्च राष्ट्रीय रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदीन और ईरानी केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती शामिल हैं।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में यह शांति वार्ता ईरान और अमेरिका द्वारा दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा किए जाने के चार दिन बाद हो रही है।

हालांकि, लेबनान पर इजराइल के बड़े पैमाने पर हमलों में 300 से अधिक लोग मारे गये हैं।

तेहरान ने दावा किया कि हमले ने युद्धविराम समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है, वहीं अमेरिका और इजराइल ने कहा कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं था।

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तसनीम’ ने खबर दी कि किसी संभावित शांति वार्ता की शुरुआत से पहले ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ अलग-अलग बैठक करेंगे।

इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ ने शनिवार को उम्मीद जताई कि यहां होने वाली अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता से पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी।

विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा कि शरीफ ने यह बात उपराष्ट्रपति वेंस के नेतृत्व में आए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के दौरान कही।

इसमें कहा गया है कि दोनों प्रतिनिधिमंडलों की रचनात्मक रूप से बातचीत करने की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए, प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि ये वार्ता क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में एक कदम साबित होगी।

वेंस के नूर खान एयरबेस पहुंचने पर पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इसहाक डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने उनकी अगवानी की।

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के अनुसार, डार ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति का स्वागत करते हुए क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर स्थायी शांति एवं स्थिरता हासिल करने को लेकर अमेरिका की प्रतिबद्धता की सराहना की।

डार ने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष रचनात्मक ढंग से बातचीत करेंगे। उन्होंने पश्चिम एशिया के संघर्ष का स्थायी और टिकाऊ समाधान निकालने की दिशा में पाकिस्तान की मध्यस्थता जारी रखने की इच्छा भी दोहराई।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बातचीत आज शाम से शुरू होगी या नहीं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बातचीत सेरेना होटल में होगी।

गालिबफ ने पाकिस्तान आते समय विमान के भीतर की एक तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में वह हमलों में मारी गई मिनाब स्कूल की छात्राओं की विमान की सीट पर रखी तस्वीरों के सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं।

गालिबफ ने यह तस्वीर साझा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘इस उड़ान में मेरे साथी – मिनाब 168।’’

इससे पहले ‘तसनीम’ समाचार एजेंसी ने बताया था कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक तेहरान की ‘‘पूर्व शर्तें’’ पूरी नहीं हो जातीं, जिनमें लेबनान के खिलाफ इजराइल की शत्रुता को रोकना शामिल है।

अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमले किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हुआ। इस युद्ध की शुरुआत के बाद ईरान और अमेरिका के बीच यह पहली उच्चस्तरीय वार्ता होगी।

ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर इस वार्ता के बाद शांति समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करेगा।

वेंस ने पाकिस्तान रवाना होने से पहले कहा था कि वह वार्ता को लेकर आशान्वित हैं और उम्मीद करते हैं कि यह ‘‘सकारात्मक’’ रहेगी।

वेंस ने विमान में सवार होने से पहले कहा था, “जैसा कि (अमेरिका के) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरानी अच्छी नीयत से बातचीत करने को तैयार हैं, तो हम सहयोग का हाथ बढ़ाने के लिए निश्चित रूप से तत्पर हैं, लेकिन अगर वे हमारे साथ ‘खेल खेलने’ की कोशिश करेंगे, तो उन्हें पता चलेगा कि वार्ता करने वाली टीम इतनी भी सहयोगी नहीं है।’’

शनिवार तड़के इस्लामाबाद पहुंचने के बाद, गालिबफ ने पत्रकारों से अमेरिका के साथ भरोसे के मुद्दे पर बात की और उन्हें ईरान के उस देश के साथ बीते अनुभवों की याद दिलाई। उन्होंने कहा,‘‘हमारे मन में सद्भावना तो है, लेकिन अमेरिकियों पर हमें भरोसा नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी पक्ष ‘‘वास्तविक समझौते’’ के लिए तैयार है, तो वह तेहरान की तत्परता को देखेगा।

ईरान ने वार्ता के लिए 10 सूत्री योजना रखी है, जिसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी सेनाओं की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की अनुमति देने की मांगें शामिल हैं।

ईरानी मीडिया ने बताया कि इस्लामाबाद गये ईरान के प्रतिनिधिमंडल में वार्ताकारों, विशेषज्ञों और सुरक्षा अधिकारियों समेत 71 लोग शामिल हैं।

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने लेबनान में देश के राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी के साथ टेलीफोन पर बातचीत की।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा था कि लेबनान पर इजराइली हमले ने शुरुआती युद्धविराम का ‘‘स्पष्ट रूप से उल्लंघन’’ किया है और इससे बातचीत का कोई मतलब नहीं रह जायेगा।

वार्ता के लिए इस्लामाबाद को ‘रेड अलर्ट’ पर रखा गया है और वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडलों की बहुस्तरीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी में 10,000 से अधिक पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है।

भाषा

देवेंद्र दिलीप

दिलीप