काहिरा, 28 अप्रैल (एपी) सूडान की सेना और एक अर्द्धसैनिक बल ‘रैपिड सपोर्ट फोर्स’(आरएसएफ) के बीच हुए एक नाजुक संघर्ष विराम समझौते के बावजूद देश की राजधानी खार्तूम और ओमडुरमैन में शुक्रवार तड़के भीषण विस्फोट और गोलीबारी हुई। स्थानीय निवासियों ने यह जानकारी दी।
हिंसाग्रस्त सूडान के दो शीर्ष जनरल के बीच हुए संघर्षविराम समझौते के बावजूद यह हिंसा हुई। सत्ता को लेकर इन दोनों जनरल के संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो गई है।
दोनों प्रतिद्वंद्वी पक्षों ने बृहस्पतिवार देर रात 72 घंटे के संघर्ष विराम को स्वीकार किया। इस समझौते के बावजूद हिंसा नहीं रुकी, लेकिन इसने हजारों सूडानी नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और अन्य देशों को भूमि, हवाई और जलमार्ग के जरिए अपने नागरिकों को स्वदेश लाने का पर्याप्त समय दे दिया।
तुर्किये के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अपने देश के नागिरकों को सूडान से बाहर निकालने के लिए वादी सईदना की ओर बढ़ रहे सी-130 विमान को ‘‘हल्के हथियारों से निशाना’’ बनाया गया।
मंत्रालय ने एक ट्वीट में बताया कि विमान सुरक्षित उतर गया और कोई कर्मी हताहत नहीं हुआ। सूडानी सेना ने तुर्किये के विमान पर हुए इस हमले के लिए आरएसएफ को जिम्मेदार ठहराया है। आरएसएफ ने अभी इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है।
स्थानीय निवासियों ने खार्तूम के काफौरी में भीषण संघर्ष की सूचना दी। इससे पहले, इसी स्थान पर सेना ने अपने प्रतिद्वंद्वी रैपिड सपोर्ट फोर्सेज पर बमबारी करने के लिए युद्धक विमानों का इस्तेमाल किया था।
सेना के मुख्यालय, सूडान में राष्ट्रपति के आवास ‘रिपब्लिकन पैलेस’ और खार्तूम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास के क्षेत्रों में भी झड़पों की सूचना मिली है।
सेना और उसके प्रतिद्वंद्वी अर्द्धसैनिक बल के बीच 15 अप्रैल को संघर्ष शुरू हुआ था।
ओमडुरमैन में भी एक समूह ने कैरारी जिले में शुक्रवार से लगातार विस्फोट होने की जानकारी दी और इलाके में रह रहे लोगों से सतर्क रहने को कहा।
आरएसएफ ने ओमडुरमैन और खार्तूम के दक्षिण में स्थित जबल औलिया में उसके ठिकानों पर सेना द्वारा विमान से बमबारी किए जाने का दावा किया जबकि सेना ने आरएसएफ पर हमले शुरू करने का आरोप लगाया। किसी भी पक्ष के दावे की पुष्टि नहीं की जा सकती है।
जनरल अब्देल-फतह बुरहान के नेतृत्व में सूडान की सेना और जनरल मोहम्मद हमदान डागलो के नेतृत्व में ‘रैपिड सपोर्ट फोर्स’ के बीच सत्ता संघर्ष ने सूडान के लोकतांत्रिक देश बनने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
एपी सिम्मी पवनेश
पवनेश