ध्रुवीय भालू मानव बस्तियों के पास क्यों आते हैं, कारण अधिक जटिल : अध्ययन

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ध्रुवीय भालू मानव बस्तियों के पास क्यों आते हैं, कारण अधिक जटिल : अध्ययन

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  • Publish Date - May 1, 2026 / 12:51 PM IST,
    Updated On - May 1, 2026 / 12:51 PM IST

( डगलस क्लार्क, सस्केचवान यूनिवर्सिटी )

सस्केटून (कनाडा), एक मई (द कन्वरसेशन) ध्रुवीय भालू अत्यंत जिज्ञासु होते हैं और यही जिज्ञासा अक्सर उन्हें इंसानी ढांचे और बस्तियों के करीब ले आती है, जिससे दोनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि इसके पीछे के कारण पहले की तुलना में अधिक जटिल हैं।

अध्ययन के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र के गर्म होने के कारण कई ध्रुवीय भालू समुद्री बर्फ से दूर तटों पर अधिक समय बिता रहे हैं, जहां वे आमतौर पर सील का शिकार करते हैं।

वैज्ञानिकों ने 2011 से 2021 के बीच मैनिटोबा के वपुस्क नेशनल पार्क और चर्चिल नॉर्दर्न स्टडीज सेंटर में कैमरे लगाकर यह जानने की कोशिश की कि भालू इन स्थानों पर कितनी बार आते हैं।

अध्ययन में कुल 580 बार भालुओं की आवाजाही दर्ज की गई, जो मुख्य रूप से जुलाई से नवंबर के बीच हुई। शोध में पाया गया कि इन स्थानों पर मानव गतिविधियों का भालुओं के आने की संख्या पर कोई खास असर नहीं पड़ा।

हालांकि, समुद्री बर्फ के बिना रहने की अवधि (आइस-फ्री सीजन) का इस पर स्पष्ट प्रभाव देखा गया। जिन वर्षों में यह अवधि लंबी रही, उन वर्षों में भालुओं की आवाजाही अधिक दर्ज की गई।

शोधकर्ताओं ने पाया कि भालुओं के शरीर की स्थिति (यानी वे कमजोर हैं या स्वस्थ) का उनके मानव बस्तियों की ओर आने से सीधा संबंध नहीं है। अपेक्षा के विपरीत, केवल कमजोर या भूखे भालू ही नहीं, बल्कि सभी भालू लंबे समय तक बर्फ से दूर रहने पर इन क्षेत्रों के पास आते हैं।

हालांकि, अध्ययन में यह संकेत मिला कि शरीर की स्थिति इस बात को प्रभावित कर सकती है कि इंसानों और भालुओं के बीच होने वाली मुठभेड़ कितनी गंभीर हो सकती है। कमजोर भालू भोजन पाने के लिए अधिक आक्रामक हो सकते हैं।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि युवा भालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, जो आमतौर पर इंसानों के साथ संघर्ष में अधिक शामिल होते हैं। इसका कारण पश्चिमी हडसन बे क्षेत्र में समुद्री बर्फ की अवधि में बदलाव के चलते उनके जीवित रहने की दर में कमी माना जा रहा है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि उनके निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि समुद्री बर्फ का कम होना सीधे तौर पर भालुओं और इंसानों के बीच संपर्क बढ़ाने का कारण नहीं है, बल्कि यह समझना जरूरी है कि किन परिस्थितियों में ये संपर्क खतरनाक टकराव में बदलते हैं।

अध्ययन में यह भी कहा गया कि भालुओं के मानव बस्तियों के पास आने की संभावना मानव नियंत्रण से बाहर हो सकती है, लेकिन ऐसे मामलों के परिणामों को नियंत्रित किया जा सकता है।

शोध के निष्कर्ष स्थानीय और आदिवासी समुदायों के अवलोकनों के अधिक करीब पाए गए, जिनके अनुसार मानव बस्तियों के पास आने वाले भालू जरूरी नहीं कि कमजोर या भूखे ही हों।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इस विषय में पहले से मौजूद कुछ वैज्ञानिक धारणाओं की दोबारा जांच करने की जरूरत है, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष को बेहतर तरीके से समझा और कम किया जा सके।

(द कन्वरसेशन) मनीषा अविनाश

अविनाश