पटना, नौ फरवरी (भाषा) बिहार के उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि 1995 से 2015 के बीच धार्मिक यात्रा के उद्देश्य से राज्य में कुल 173 विदेशी नागरिक आए, जिनमें से 167 पाकिस्तान से थे।
सम्राट ने कहा कि शेष आगंतुक ब्रिटेन, रूस और उज़्बेकिस्तान से थे, और सभी अपने-अपने देश लौट गए।
मंत्री ने यह जानकारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक मिथिलेश तिवारी की ओर से पूछे गये प्रश्न के उत्तर में दी।
गृह मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि धार्मिक यात्रा पर आने वाले प्रत्येक विदेशी नागरिक की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाती है और सरकार यह सुनिश्चित करती है कि उनके द्वारा कोई आपराधिक गतिविधि न हो।
उन्होंने कहा कि इमीग्रेशन और सुरक्षा एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ काम करती हैं और संदिग्ध मामलों में कार्रवाई की जाती है।
तिवारी ने धार्मिक यात्राओं की आड़ में विदेशी नागरिकों की पहचान, सत्यापन और दीर्घकालिक मौजूदगी को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
उन्होंने कहा कि पर्यटन या धार्मिक यात्रा के बहाने आने वाले कुछ लोग बाद में स्थानीय समाज में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि उनकी आधिकारिक पहचान धुंधली पड़ जाती है।
उनके अनुसार, धार्मिक आस्था के नाम पर आने वाले कुछ विदेशी नागरिकों के बारे में स्थानीय स्तर पर चर्चा तो होती है, लेकिन उनके आगमन और गतिविधियों का कोई स्पष्ट सरकारी ट्रैक रिकॉर्ड दिखाई नहीं देता।
विधायक ने अपने क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि गोपालगंज जिले में थावे मंदिर को छोड़कर आसपास कोई बड़ा धार्मिक केंद्र नहीं है, इसके बावजूद समय-समय पर विदेशी नागरिकों की मौजूदगी देखी जाती है।
भाषा कैलाश खारी रंजन
रंजन