बिहार विधानसभा से ऑनलाइन समेत सभी प्रकार के जुए पर प्रतिबंध संबंधी विधेयक सर्वसम्मति से पारित

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बिहार विधानसभा से ऑनलाइन समेत सभी प्रकार के जुए पर प्रतिबंध संबंधी विधेयक सर्वसम्मति से पारित

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 06:19 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 06:19 PM IST

पटना, 21 जुलाई (भाषा) बिहार विधानसभा से मंगलवार को बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026 मानसून सत्र के दूसरे दिन सर्वसम्मति से पारित हो गया।

इस विधेयक में ऑनलाइन, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, कंप्यूटर अथवा मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से खेले जाने वाले जुए सहित सभी प्रकार के जुए पर प्रतिबंध लगाया गया है।

विधेयक में ‘बिग बैकारा’, ‘सिक्स-व्हील’, ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’, ‘केमिन डी फेर’, ‘क्रैप्स’, ‘फ्लश’, ‘ब्रैग’, ‘थ्री-कार्ड गेम’, ‘केनो’, ‘पोंटून-21’, ‘रूलेट’, ‘स्लॉट्स’, सुपर पैन-9 तथा राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किए जाने वाले अन्य भाग्य आधारित खेलों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

विधेयक में जुए से संबंधित विज्ञापन देने, उसके मुद्रण, प्रकाशन अथवा किसी भी प्रकार से उसके प्रचार-प्रसार पर भी रोक लगायी गयी है।

विधेयक पर सरकार का पक्ष रखते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने सदन में कहा कि इसके लागू होने के बाद लगभग 160 वर्ष पुराना सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 निरस्त हो जाएगा और उसकी जगह बिहार जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम, 2026 लागू होगा, ताकि वर्तमान समय में जुए के बदलते स्वरूप से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है, ‘‘केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 को निरस्त कर वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप सार्वजनिक जुए को विनियमित करने के लिए नया कानून बनाएं। इसलिए इस विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 को निरस्त कर उसके स्थान पर बिहार जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम, 2026 लागू करना है।’’

विधेयक के अनुसार, सट्टेबाजी का अर्थ किसी अनिश्चित घटना के परिणाम पर धन, आभासी मुद्रा, डिजिटल मुद्रा अथवा किसी अन्य मूल्यवान वस्तु को दांव पर लगाना है, भले ही उसे कानून द्वारा मुद्रा के समकक्ष मान्यता प्राप्त न हो।

इसी प्रकार, जुए की परिभाषा किसी भी प्रकार के वित्तीय लाभ या प्रतिफल की मंशा से भौतिक, ऑनलाइन, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल अथवा आभासी माध्यम से लगाए गए दांव या सट्टे के रूप में की गई है। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि दांव प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लगाया गया हो अथवा प्रतिफल धन के रूप में मिले या किसी अन्य रूप में, इससे कोई अंतर नहीं पड़ेगा।

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, उपनिरीक्षक या उससे ऊपर के रैंक का कोई भी पुलिस अधिकारी किसी सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलते या जुआ खेलने में सहायता करते पाए गए व्यक्ति की बिना वारंट तलाशी ले सकेगा अथवा उसे गिरफ्तार कर सकेगा। ऐसे व्यक्ति को छह महीने तक कारावास हो सकती है या उसपर तीन हजार रुपये से 10 हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है अथवा दोनों ही दंड लग सकते हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सामान्य जुआघर का संचालन, प्रबंधन या वित्तपोषण करने वाले व्यक्ति को पहली बार दोषी पाए जाने पर छह महीने से तीन वर्ष तक कारावास हो सकता है और उसपर 50 हजार रुपये तक जुर्माना लग सकता है। दोबारा अपराध करने पर कम से कम दो वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष का कारावास हो सकता है तथा एक लाख रुपये तक जुर्माने लग सकता है।

विधेयक में ऑनलाइन जुए के मामलों में अधिक कठोर दंड का प्रस्ताव किया गया है। पहली बार ऑनलाइन जुआ खेलने या उसमें सहायता करने का दोषी पाए जाने पर कम से कम एक वर्ष से तीन वर्ष तक के कारावास तथा न्यूनतम 50 हजार रुपये से अधिकतम पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

ऑनलाइन जुए की पुनरावृत्ति होने पर कम से कम दो वर्ष से सात वर्ष तक के कारावास तथा न्यूनतम एक लाख रुपये से अधिकतम 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

हालांकि, विपक्ष की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राहुल कुमार और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अख्तरुल इमाम ने विधेयक में कुछ संशोधन प्रस्तावित किए थे, लेकिन सरकार के आग्रह पर उन्होंने अपने संशोधन प्रस्ताव वापस ले लिए।

भाषा कैलाश

राजकुमार

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