बिहार: मॉडल विद्यालयों को भगवा रंग से रंगने के सरकार के फैसले पर उठ सियासी विवाद

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बिहार: मॉडल विद्यालयों को भगवा रंग से रंगने के सरकार के फैसले पर उठ सियासी विवाद

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  • Publish Date - July 20, 2026 / 04:58 PM IST,
    Updated On - July 20, 2026 / 04:58 PM IST

पटना, 20 जुलाई (भाषा) बिहार में 500 से अधिक मॉडल विद्यालयों को भगवा रंग से रंगने के राज्य सरकार के हालिया निर्देश को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों ने इस फैसले का बचाव किया वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) सहित विपक्षी दलों ने इसे ‘‘भगवाकरण’’ की कोशिश करार दिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को ऐसे 551 मॉडल विद्यालयों का उद्घाटन किया था।

शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ‘सरस्वती विद्या निकेतन’ नाम वाले इन विद्यालयों को गुलाबी, आसमानी या पीले जैसे पारंपरिक रंगों के बजाय भगवा रंग से रंगा जाए।

एआईएमआईएम की बिहार इकाई के अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की।

उन्होंने विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को सदन के बाहर पत्रकारों से कहा, ‘‘यह सरकार केवल विद्यालयों का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का भगवाकरण कर रही है। मस्जिदों को गिराया जा रहा है और मस्जिद-मंदिर के नाम पर लोगों के बीच वैमनस्य फैलाया जा रहा है। लोकतंत्र का चीरहरण किया जा रहा है।’’ ईमान ने आरोप लगाया कि सरकार करदाताओं के पैसे से एक विशेष धर्म को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है, जो लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘देश का भविष्य खराब किया जा रहा है। समाज में जो प्रेम और सौहार्द कभी था, वह नई पीढ़ी में दिखाई नहीं देता। यह लोकतंत्र और किसी भी सभ्य समाज के लिए अच्छा संकेत नहीं है।’’

राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने रंग के मुद्दे पर विवाद खड़ा करने के लिए विपक्ष की आलोचना की और कहा कि सरकार शिक्षा के आधुनिकीकरण के लिए लगातार काम कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘रंग के आधार पर विभाजन नहीं होना चाहिए। आज हम सभी धर्मों के बच्चों के लिए उच्च तकनीक वाली शिक्षा व्यवस्था तैयार कर रहे हैं। विपक्ष को यह रास नहीं आ रहा है। लेकिन उन्हें भरोसा रखना चाहिए कि हम ‘चरवाहा विद्यालय’ की वापसी नहीं होने देंगे।’’

‘चरवाहा विद्यालय’ बिहार में सदी की शुरुआत के आसपास राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सरकार की एक प्रमुख योजना थी, जिसकी बाद में शिक्षा क्षेत्र में अपेक्षित प्रगति नहीं होने को लेकर आलोचना हुई थी।

तिवारी ने कहा कि भगवा रंग देवी सरस्वती और समृद्धि का प्रतीक है तथा राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

बिहार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी ने कहा कि विपक्ष को विद्यालयों के रंग पर ध्यान देने के बजाय यह चर्चा करनी चाहिए कि राज्य में राजग के दो दशक के शासन के दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है या नहीं।

जदयू के विधान परिषद सदस्य खालिद अनवर ने भी इसी तरह की राय व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ‘‘रंग की राजनीति’’ नहीं बल्कि ‘‘विकास की राजनीति’’ में विश्वास करती है।

उन्होंने कहा, ‘‘बिहार में 500 से अधिक मॉडल स्कूल खोले गए हैं, जो नीतीश कुमार के एजेंडे के अनुरूप है। भविष्य में और भी स्कूल खोले जाएंगे। यह एक अच्छा कदम है, लेकिन अगर कोई केवल रंग को लेकर विवाद खड़ा करना चाहता है, तो यह उचित नहीं है।’’

भाषा कैलाश जितेंद्र

जितेंद्र