कुम्हरार पार्क के समग्र विकास के लिए केंद्र को पत्र लिखने का निर्देश : नीतीश

कुम्हरार पार्क के समग्र विकास के लिए केंद्र को पत्र लिखने का निर्देश : नीतीश

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  • Publish Date - January 2, 2026 / 04:17 PM IST,
    Updated On - January 2, 2026 / 04:17 PM IST

पटना, दो जनवरी (भाषा) बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल कुम्हरार पार्क का निरीक्षण किया और अधिकारियों को इसके समग्र विकास के लिए भारत सरकार को पत्र लिखने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुम्हरार पार्क मगध साम्राज्य से जुड़ा एक अत्यंत प्राचीन और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है जहां बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक, इतिहास के विद्यार्थी तथा शोधकर्ता आते हैं।

उन्होंने कहा कि पार्क एवं संबंधित चीजों का बेहतर रखरखाव और सौंदर्यीकरण आवश्यक है, ताकि आगंतुकों को इस स्थल के इतिहास को समझने में अधिक सुविधा हो सके।

मुख्यमंत्री ने पार्क परिसर में संरक्षित मगध कालीन स्तंभ अवशेषों का अवलोकन किया। उन्होंने बुलंदीबाग उत्खनन, कुम्हरार उत्खनन, मौर्यकालीन अस्सी स्तंभों वाले विशाल सभागार से संबंधित जानकारी बोर्डों को देखा। इसके अलावा, उन्होंने कृष्णदेव स्मृति सभागार स्थित पाटलिपुत्र दीर्घा में कुम्हरार की मौर्यकालीन वास्तुकला, भौतिक सांस्कृतिक आयाम, उत्खनन से प्राप्त भग्नावशेष तथा पाटलिपुत्र की कला और संस्कृति से संबंधित चित्र प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि कुम्हरार पार्क परिसर भारत सरकार के अधीन है और इसका रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किया जाता है। पूर्व में यहां किए गए उत्खनन के दौरान कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक वस्तुएं और निर्माण अवशेष प्राप्त हुए हैं।

यहां 1912-15 तथा 1951-55 के दौरान हुई खुदाई में मौर्यकालीन अस्सी स्तंभों वाला एक विशाल सभागार सामने आया था। भू-जल स्तर में वृद्धि और आसपास के विकास कार्यों के कारण यह भग्नावशेष जलमग्न होने लगा था जिससे उसके अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो गया। इसके बाद विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा पर 2005 में संरक्षण की दृष्टि से इस स्थल को मिट्टी और बालू से भर दिया गया।

इतिहासकारों के अनुसार प्राचीन काल में आधुनिक पटना को पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था। छठी शताब्दी ईसा पूर्व में भगवान बुद्ध के समय यह क्षेत्र पाटलिग्राम नामक एक छोटा गांव था। बाद में मगध सम्राटों के काल में यह एक प्रमुख राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ। यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने अपनी पुस्तक ‘इंडिका’ में पाटलिपुत्र का विस्तृत वर्णन किया है।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के साथ मंत्री, अधिकारी तथा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी भी थे।

भाषा कैलाश

राजकुमार

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