बिहार में दाखिल-खारिज में बहानेबाजी नहीं चलेगी, मामलों का त्वरित निपटारा होगा: उपमुख्यमंत्री

Ads

बिहार में दाखिल-खारिज में बहानेबाजी नहीं चलेगी, मामलों का त्वरित निपटारा होगा: उपमुख्यमंत्री

  •  
  • Publish Date - April 3, 2026 / 06:07 PM IST,
    Updated On - April 3, 2026 / 06:07 PM IST

पटना, तीन अप्रैल (भाषा) बिहार में भूमि के दाखिल-खारिज मामलों में होने वाले अनावश्यक विलंब को समाप्त करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बड़ा कदम उठाया है।

उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को कहा कि अब ‘‘सक्षम न्यायालय’’ और ‘‘लंबित’’ शब्द की स्पष्ट परिभाषा तय कर दी गई है।

इससे दाखिल-खारिज मामलों को बेवजह लंबित रखने की प्रवृत्ति समाप्त होगी और उनका त्वरित निष्पादन सुनिश्चित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा 6(12) में प्रयुक्त “सक्षम न्यायालय में लंबित” शब्द की अलग-अलग व्याख्या के कारण कई अंचलों में दाखिल-खारिज वादों के निपटारे में अनावश्यक देरी हो रही थी।

इस समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने विस्तृत समीक्षा कर सभी स्तर के राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि नए निर्देशों के अनुसार “सक्षम न्यायालय” में दिवानी/व्यवहार न्यायालय (दीवानी अदालत), पटना उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय शामिल होंगे।

इसके अलावा उप समाहर्ता, भूमि सुधार (डीसीएलआर), जिलाधिकारी एवं आयुक्त न्यायालय, विधि विभाग द्वारा अधिकृत न्यायालय तथा बिहार भूमि न्यायाधिकरण (बीएलटी) को भी सक्षम न्यायालय की श्रेणी में रखा गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि “लंबित” का अर्थ केवल वही वाद होगा जो विधिवत दायर होकर न्यायालय में प्रक्रियाधीन हो और जिसमें न्यायालय द्वारा संज्ञान (एडमिशन) लिया गया हो, नोटिस निर्गत हुआ हो या स्थगन/अंतरिम आदेश, जैसे स्टे ऑर्डर, अस्थायी या स्थायी निषेधाज्ञा अथवा ‘स्टेटस को’ प्रभावी हो।

केवल किसी आवेदन, आपत्ति या अभ्यावेदन का दायर होना “सक्षम न्यायालय में लंबित” नहीं माना जाएगा।

सिन्हा ने कहा कि यदि किसी सक्षम न्यायालय द्वारा स्पष्ट स्थगनादेश या अंतरिम आदेश प्रभावी नहीं है, तो राजस्व अधिकारी नियमानुसार अपनी कार्रवाई जारी रखेंगे और दाखिल-खारिज मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दायर वाद की अभिप्रमाणित प्रति में स्पष्ट रूप से स्वीकारण अंकित नहीं है, तो उसे भी “लंबित” नहीं माना जाएगा।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि वास्तविक क्रेताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाया जाए और भूमि से जुड़े मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इन स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करते हुए राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित सेवा सुनिश्चित करें।

भाषा कैलाश

संतोष

संतोष