कृषि सब्सिडी से वाहन फिटनेस तक अनियमितताओं की परतें उजागर, हजारों करोड़ रुपये के बकाये पर सवाल

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कृषि सब्सिडी से वाहन फिटनेस तक अनियमितताओं की परतें उजागर, हजारों करोड़ रुपये के बकाये पर सवाल

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  • Publish Date - February 26, 2026 / 04:13 PM IST,
    Updated On - February 26, 2026 / 04:13 PM IST

पटना, 26 फरवरी (भाषा) बिहार विधानसभा में बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री विजेंद्र यादव ने नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की ताज़ा रिपोर्ट पेश की, जिसे सदन ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।

हालांकि रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों ने कई विभागों की कार्यप्रणाली और राजस्व प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

चार खंडों में पेश इस रिपोर्ट में कृषि, परिवहन, खनन, राजस्व तथा शैक्षणिक अवसंरचना से जुड़े मामलों में अनियमितताओं और भारी बकाये का खुलासा हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार 2019 में दस ऐसे जिलों में 21.48 करोड़ रुपये की कृषि ‘इनपुट सब्सिडी’ का भुगतान किया गया, जिन्हें आपदा प्रबंधन विभाग ने बाढ़ प्रभावित घोषित नहीं किया था। इसके अतिरिक्त, 14 अन्य जिलों के आवेदकों को 4.03 करोड़ रुपये का भुगतान उन क्षेत्रों के नाम पर किया गया, जो चिन्हित आपदा प्रभावित सूची में शामिल नहीं थे।

रबी और खरीफ सीजन 2019 और 2020 के दौरान 151.92 करोड़ रुपये की सब्सिडी ऐसे क्षेत्रों में वितरित की गई, जो चिन्हित फसल क्षति क्षेत्र से 1.34 लाख हेक्टेयर अधिक थे।

कैग ने यह भी पाया कि राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) के निर्धारित मानकों के अनुरूप सहायता दरों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण 3.74 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हुआ।

रिपोर्ट के अनुसार 2019 एवं 2022 के बीच 6,81,617 मामलों में 159.28 करोड़ रुपये की सब्सिडी ऐसे किसानों को दी गई, जिनकी फसल क्षति 33 प्रतिशत से कम थी, जो प्रावधानों के विपरीत है।

राजस्व वसूली की स्थिति को भी रिपोर्ट में चिंताजनक बताया गया है। परिवहन विभाग में माल एवं यात्री कर के रूप में 248.58 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि वाहनों पर कर के रूप में 183.39 करोड़ रुपये की वसूली लंबित है। विभाग ने पांच वर्षों से अधिक समय से लंबित बकायों का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं कराया।

खनन एवं धातुकर्म उद्योग पर 1,505.16 करोड़ रुपये का बकाया दर्शाया गया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने भी लंबे समय से लंबित राशि का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत नहीं किया। भू-राजस्व मद में 302.47 करोड़ रुपये, मुद्रांक शुल्क एवं निबंधन फीस में 215.61 करोड़ रुपये तथा राज्य उत्पाद में 54.30 करोड़ रुपये बकाया पाए गए। वस्तु एवं सेवा कर में 3.25 करोड़ रुपये तथा विद्युत कर एवं शुल्क मद में भी बकाया राशि का उल्लेख किया गया है।

परिवहन विभाग में वाहन फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार स्वचालित परीक्षण केंद्रों में निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और सभी मानकों की जांच किए बिना ही प्रमाण-पत्र जारी कर दिए गए।

जांच में पाया गया कि 47,223 वाहनों में से 42,672 वाहनों (90 प्रतिशत से अधिक) को नियमों के उल्लंघन के बावजूद फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी कर दिए गए, जिससे सरकार को 2.27 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हुई। इसके अलावा, 66,345 वाहनों की जांच में 35,921 वाहन फिटनेस परीक्षण में अनुत्तीर्ण पाए गए, जो सड़क सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है। कई मामलों में ‘ऑनलाइन अपॉइंटमेंट’ प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।

बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम से जुड़े प्रकरण में ठेकेदारों को 94.25 लाख रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाने का उल्लेख भी रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट के सदन में प्रस्तुत होते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और विभिन्न विभागों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

भाषा कैलाश

राजकुमार

राजकुमार