पटना, 23 अप्रैल (भाषा) जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने बृहस्पतिवार को कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को शीर्ष पद इसलिए सौंपा गया ताकि अतीत में गठबंधन सहयोगी से मिले ‘‘समर्थन’’ के बदले सहयोग किया जा सके।
जदयू के वरिष्ठ नेता एवं उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही।
उन्होंने कहा, ‘‘कल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नयी सरकार विश्वास मत हासिल करेगी। इसी उद्देश्य से विधानसभा का एक दिवसीय सत्र बुलाया गया है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास प्रचंड बहुमत है, इसलिए विश्वास मत जीतना तय है।’’
चौधरी ने कहा कि नयी सरकार को नीतीश कुमार का आशीर्वाद भी प्राप्त है, जिन्होंने राज्यसभा जाने के निर्णय के साथ मुख्यमंत्री पद छोड़ा।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन राज्य की जनता ने बार-बार उन पर भरोसा जताया है। इसलिए सभी निश्चिंत रहें कि नयी सरकार नीतीश कुमार के पदचिह्नों पर चलेगी।’’
इससे पहले, प्रदेश जदयू अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चौधरी राज्य में सत्ता परिवर्तन से जुड़े सभी सवालों का जवाब देंगे। यह प्रक्रिया एक महीने पहले तब शुरू हुई थी जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। उनके निर्वाचित होने के बाद बिहार में सम्राट चौधरी भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने।
जब चौधरी से पूछा गया कि नीतीश कुमार के पद छोड़ने के बाद जदयू ने मुख्यमंत्री पद अपने पास रखने का प्रयास क्यों नहीं किया, तो इस पर उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा पुरानी सहयोगी है। उसने 2020 में हमारा समर्थन किया था, जब विधानसभा चुनाव में हमारी सीटें काफी घट गई थीं। इसलिए तय हुआ कि उनके नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देकर उस सहयोग के बदले सहयोग किया जाए।’’
उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह विजय कुमार चौधरी के अलावा जदयू के एक अन्य वरिष्ठ नेता बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने भी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। यह पिछले सत्ता समीकरणों का उलटफेर माना जा रहा है, जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और भाजपा नेता सम्राट चौधरी तथा विजय कुमार सिन्हा उनके उपमुख्यमंत्री थे।
चौधरी से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सोशल मीडिया पोस्ट पर भी सवाल किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राजग शासन की लोकलुभावन नीतियों और भ्रष्टाचार से बिहार का खजाना खाली हो रहा है तथा सम्राट चौधरी को ‘‘कर्ज में डूबी सरकार’’ मिली है।
उपमुख्यमंत्री ने जवाब दिया, ‘‘विकास कार्यों के लिए सभी सरकारें कर्ज लेती हैं। कर्ज को लेकर घबराने की कोई वजह नहीं है। हमारे विरोधियों को यह भी याद रखना चाहिए कि जब वे सत्ता में थे तब राज्य की वित्तीय स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि सरकारी कर्मचारियों को वेतन देना भी एक चुनौती बन गया था। सौभाग्य से अब ऐसी स्थिति नहीं है।’’
उपमुख्यमंत्री का यह संकेत राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ओर था, जिसकी सरकार 2005 तक बिहार में रही थी।
विपक्ष द्वारा निशांत कुमार की तीन मई से शुरू होने वाली यात्रा को ‘‘जदयू बचाओ यात्रा’’ बताए जाने के आरोप पर चौधरी ने कहा, ‘‘लोग अच्छी तरह जानते हैं कि जदयू की यात्रा का क्या मतलब होता है और वे ऐसी यात्राओं का लाभ उठा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘निशांत जी सक्रिय नेता हैं और उनका बिहार दौरे पर निकलना स्वाभाविक है। हम उनके फैसले का स्वागत करते हैं।’’
राज्य में शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग करने वाले गठबंधन और पार्टी विधायकों के बयानों से भी उन्होंने सरकार को अलग रखा।
चौधरी ने कहा, ‘‘व्यक्तिगत हैसियत से की गई टिप्पणियां जरूरी नहीं कि पार्टी या सरकार की राय हों। राजनीतिक नेता, पार्टी और सरकार तीन अलग-अलग इकाइयां हैं।’’
भाषा
कैलाश रवि कांत