पटना, 22 जून (भाषा) बिहार में 16 मई से 20 जून के बीच 12,166 मामलों में 16,136 आरोपियों को अदालतों ने दोषी करार दिया है और सजा सुनाई है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस अवधि में 100 व्यक्तियों को आजीवन कारावास, 44 को 10 वर्ष से अधिक, 143 को 10 वर्ष से कम तथा 183 को दो वर्ष तक के कारावास की सजा दिलाई गई। इसके अलावा 15,666 व्यक्तियों से जुर्माना भी वसूला गया।
अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने सोमवार को पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी।
एडीजी ने बताया कि मई माह में शस्त्र अधिनियम के 37 मामलों में 61 अपराधियों, हत्या के 52 मामलों में 114 अपराधियों, लूट एवं डकैती के 19 मामलों में 28 आरोपियों तथा बलात्कार एवं पोक्सो अधिनियम से संबंधित 50 मामलों में 65 अपराधियों को त्वरित सुनवाई के माध्यम से अभियोजन पक्ष ने न्यायालय से सजा दिलाई।
उन्होंने बताया कि कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले मामलों में इस अवधि के दौरान सांप्रदायिक हिंसा के चार, पुलिस पर हमले के 187, भीड़ हिंसा के एक तथा हर्ष फायरिंग के तीन मामलों सहित कुल 195 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि हर्ष फायरिंग की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए पुलिस मुख्यालय स्तर से निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके बाद ऐसी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
कुमार ने बताया कि पिछले एक महीने के दौरान 86,308 वाहनों की जांच की गई। इस दौरान 8,604 वाहनों से जुर्माना वसूला गया, जिससे कुल 1.24 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई।
उन्होंने कहा कि विशेष अभियान चलाकर इस अवधि में 1,642 कुर्की वारंट को क्रियान्वित किया गया। मई माह में 387 अवैध हथियार और एक लाइसेंसी हथियार बरामद किया गया।
एडीजी ने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 107 के तहत चार अपराधियों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध न्यायालय को प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं, अपराध नियंत्रण अधिनियम (सीसीए) की धारा 3 के तहत 181 व्यक्तियों के खिलाफ संबंधित जिलाधिकारियों को प्रस्ताव भेजे गए, जिनमें से 50 मामलों में आदेश पारित किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि हत्या के मामलों में 724, डकैती में 106, लूट में 256, एससी-एसटी अधिनियम से जुड़े मामलों में 381 तथा बलात्कार, अपहरण और अन्य संगीन अपराधों में 10,513 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
भोजपुर जिले में भरत तिवारी मुठभेड़ मामले के संबंध में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में एडीजी ने कहा कि मामले की जांच के लिए शाहाबाद प्रक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) को अधिकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त मामले की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उच्च न्यायालय स्तर पर जल्द अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मामले में अब तक दो प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं।
भाषा कैलाश धीरज
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