पटना की आधुनिक विरासत: विस्मय और कौतूहल जगाने वाला अनोखा ‘एकता भवन’ हुआ जमींदोज

पटना की आधुनिक विरासत: विस्मय और कौतूहल जगाने वाला अनोखा ‘एकता भवन’ हुआ जमींदोज

पटना की आधुनिक विरासत: विस्मय और कौतूहल जगाने वाला अनोखा ‘एकता भवन’ हुआ जमींदोज
Modified Date: April 14, 2026 / 08:37 pm IST
Published Date: April 14, 2026 8:37 pm IST

पटना, 14 अप्रैल (भाषा) आधुनिक युग की विशिष्ट वास्तुकला शैली को दर्शाने वाले आकर्षक डिजाइन से सुसज्जित पटना के लगभग 40 वर्ष पुराने ‘एकता भवन’ को ध्वस्त कर दिया गया है।

यह इमारत स्थानीय लोगों के बीच विस्मय और कौतूहल का केंद्र हुआ करती थी।

इसके विशिष्ट अग्रभाग के कारण कई लोगों द्वारा ‘सैटेलाइट बिल्डिंग’ कहा जाने वाला यह ढांचा शहर के बीचोंबीच गांधी मैदान के पास गंगा के किनारे स्थित था और कुछ सप्ताह पहले इसे ढहा दिया गया, ताकि प्रस्तावित ‘पटना हाट’ के लिए जगह बनाई जा सके।

बिहार सरकार के इस हालिया कदम की संरक्षण वास्तुकारों के एक वर्ग और राजधानी के कई निवासियों ने आलोचना की है। उनका कहना है कि इस इमारत को ध्वस्त करने के बजाय इसे नयी परियोजना में शामिल किया जा सकता था, क्योंकि यह एक ‘लैंडमार्क’ के रूप में अलग पहचान रखती थी।

अभिलेखीय रिकॉर्ड के अनुसार, पटना आयुक्त कार्यालय के सामने स्थित ‘इंदिरा गांधी एकता भवन’ की आधारशिला नौ सितंबर 1986 को तत्कालीन उपराष्ट्रपति आर. वेंकटरमण ने रखी थी। इस मौके पर उन्होंने भाषण भी दिया था।

हालांकि, इमारत की मुख्य संरचना वर्षों में बनकर तैयार हो गई थी, लेकिन आंतरिक सज्जा और अन्य सिविल-इलेक्ट्रिकल कार्यों का काम कभी पूरा नहीं हो सका, जिसके कारण यह ऐतिहासिक अशोक राजपथ पर ‘जिज्ञासा के एक आधुनिक स्मारक’ के रूप में खड़ी रही।

शहर में दूर से साफ दिखाई देने के बावजूद, अधिकांश स्थानीय निवासी इस इमारत के नाम से या तो अनजान थे या उसे याद करने में कठिनाई महसूस करते थे।

इस इमारत की कहानी समझने के लिए पीटीआई-भाषा ने पटना, मुंबई और अन्य बड़े शहरों के कई वरिष्ठ वास्तुकारों से बात की, जहां इसी तरह की आधुनिक वास्तु शैली की इमारतें प्रचलन में हैं।

बिहार की राजधानी में स्थित इस “असामान्य इमारत” के वास्तुकार कौन थे, इसे लेकर अब तक कोई जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, हालांकि कुछ का मानना है कि इसे “बिहार के बाहर की किसी कंपनी” ने डिजाइन किया था।

इसे ध्वस्त किये जाने के साथ ही इस “कौतूहल भरे ढांचे” को लेकर रहस्य और गहरा गया है।

संरक्षण वास्तुकार दिप्तांशु सिन्हा (30) वर्तमान में बर्लिन की एक संस्था में स्नानकोत्तर की पढ़ाई कर रहे हैं।

सिन्हा ने कहा कि इस आधुनिक इमारत को संरक्षित करने के बजाय ढहाए जाने की खबर सुनकर वह “स्तब्ध” हैं।

उन्होंने इस इमारत को “संभवतः पूरे बिहार में वास्तुकला का एक अनूठा नमूना” बताया।

उन्होंने बर्लिन से ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “इस इमारत के निर्माण में इस्तेमाल की गई वास्तुशैली को आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन यह ‘ब्रूटलिस्ट डिजाइन’ की श्रेणी में आती है।”

ब्रूटलिस्ट वास्तुकला एक शैली है, जो ब्रिटेन में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वर्ष 1950 के दशक में विकसित हुई और बाद में दुनिया के अन्य हिस्सों में फैल गई।

पटना के मूल निवासी सिन्हा ने अफसोस जताते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे पटना में ‘स्वतंत्रता के बाद की वास्तुकला’ के लिए भी कोई जगह नहीं बची है

सिन्हा ने पहले दिल्ली स्थित एनजीओ इंटैक के साथ मिलकर सदियों पुराने पटना कलेक्टरेट को बचाने के प्रयास किए थे, जिसे 2022 में नीतीश कुमार नीत सरकार ने ध्वस्त कर दिया था।

उन्होंने तर्क दिया, “सबसे पहले तो जिस जमीन पर यह इमारत थी, वह ‘पटना हाट’ के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसी परियोजना के लिए शहर से थोड़ा बाहर विस्तृत क्षेत्र होना चाहिए, ताकि लोग वहां घूमने जा सकें, लेकिन वे पुरानी इमारतों को हटाकर हर परियोजना को शहर के केंद्र में ही स्थापित करना चाहते हैं।”

सिन्हा ने यह भी कहा कि करीब 40 साल पुरानी, मजबूत इमारत को गिराना “संवहनीयता के विचार के खिलाफ” है।

उन्होंने सवाल किया, “इसे कम से कम ‘पटना हाट’ परियोजना में शामिल कर पुनः उपयोग किया जा सकता था। इमारतों को ढहाने की इतनी जल्दी क्यों?”

पटना के निवासी रुम्मानुल फैजी यूसुफ ने भी इसे ध्वस्त किये जाने पर अफसोस जताया।

यूसुफ सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी हैं।

उन्होंने कहा, “यह बहुत ही अनोखी इमारत थी और जब भी हम इसके पास से गुजरते थे, यह हमें अपनी ओर आकर्षित करती थी। इसकी बनावट ‘सैटेलाइट’ जैसी लगती थी। इसके खास डिजाइन की वजह से कई लोग इसे ‘सैटेलाइट बिल्डिंग’ कहते थे। अब इसे गिराए जाने के बाद यह एक रहस्य बनकर रह जाएगा।”

विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रूटलिस्ट वास्तुकला की श्रेणी में आने वाली इमारतों में मध्य दिल्ली स्थित एनडीएमसी मुख्यालय और दक्षिण दिल्ली क्षेत्र की कुछ अन्य इमारतें शामिल हैं।

दिल्ली स्थित वास्तु फर्म एबीआरडी के सह-संस्थापक अनुपम बंसल का कहना है कि ‘ब्रूटलिस्ट’ डिजाइन वाली इमारतें अक्सर लोगों में तीव्र प्रतिक्रिया पैदा करती हैं।

उन्होंने कहा, ‘इन ढांचों में तीखे नक्काशीदार रूप और ज्यामितीय डिजाइन होते हैं, और एक बार बन जाने के बाद, अपने असामान्य डिजाइन के कारण ये ऐसे लगते हैं जैसे मानो सीधे आसमान से गिरे हों; कई बार ये लोगों को चौंका भी देते हैं।’

वर्ष 1990 के दशक के उत्तरार्ध से आधुनिक वास्तुकला के क्षेत्र में काम कर रहे इस अनुभवी वास्तुकार ने कहा कि पुरानी सार्वजनिक इमारतों के मामले में एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

पटना में, शहरी नियोजन विशेषज्ञ, इतिहासकार और विरासत प्रेमी सरकार से एक व्यापक नीति के माध्यम से पटना शहर और शेष बिहार की विरासत इमारतों, जिनमें औपनिवेशिक काल के ढांचे भी शामिल हैं, के संरक्षण, बहाली और अनुकूल पुन: उपयोग का आग्रह कर रहे हैं।

एनआईटी-पटना से सेवानिवृत्त हुए अनुभवी संरक्षण वास्तुकार फुलेना रजक ने कहा, ‘जब ‘एकता भवन’ का निर्माण हो रहा था, तब हमने वहां का दौरा किया था, इसे संरक्षित किया जाना चाहिए था।’

अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार के पर्यटन विभाग ने 48 करोड़ रुपये की लागत से ‘पटना हाट’ बनाने की योजना बनाई है, जो प्राचीन मगध क्षेत्र की कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को प्रदर्शित करेगा।

उन्होंने बताया कि सरकार पहले ही ‘मिथिला हाट’ स्थापित कर चुकी है, जिसका उद्घाटन कुछ साल पहले उत्तर बिहार के मधुबनी जिले में किया गया था, और पुराने शाहाबाद क्षेत्र की संस्कृति को दर्शाने वाले रोहतास जिले में ‘भोजपुर हाट’ स्थापित करने की योजना भी चल रही है।

भाषा

राखी दिलीप

दिलीप


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