पटना, 24 अप्रैल (भाषा) बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने शुक्रवार को कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल निर्देशों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के साथ विश्वास और सहयोग के माध्यम से ही दी जा सकती है।
शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल रहे चौधरी ने विद्यालयों के नियमित निरीक्षण को अनिवार्य बताया और कक्षा-कक्ष में शिक्षण कार्य के दौरान ही शिक्षकों के मूल्यांकन पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर शैक्षणिक सुधार को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
पटना के अधिवेशन भवन में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में चौधरी ने स्थानांतरण-पदस्थापन प्रणाली को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में अच्छी पढ़ाई तभी होगी, जब शिक्षक मन से पढ़ाएं और इसके लिए अनुकूल वातावरण होना जरूरी है।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार उप मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता को शिक्षा सुधार की आधारशिला बताते हुए प्रशिक्षण मॉड्यूल के प्रभावी आकलन और उसके परिणामों के नियमित मूल्यांकन की आवश्यकता को रेखांकित किया। साथ ही गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के माध्यम से संचालित कार्यक्रमों की समय-समय पर समीक्षा तथा उनके प्रभाव का आकलन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
कार्यशाला के प्रारंभिक सत्र में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र ने कहा कि शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए संसाधनों का सटीक आकलन और प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। इस क्रम में सभी अधिकारियों को प्रखंडवार रिक्तियों और स्वीकृत पदों का अद्यतन करने का निर्देश दिया गया, ताकि कार्यबल का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने आदर्श विद्यालयों के संचालन हेतु निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षकों के व्यवस्थित प्रशिक्षण तथा विद्यालय भवनों को नवाचारी और आकर्षक स्वरूप में विकसित करने पर विशेष बल दिया। साथ ही सभी कर्मियों के वेतन के समयबद्ध भुगतान को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने प्रतिनियुक्ति के स्थान पर अन्य व्यक्तियों को भेजने वाले शिक्षकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी।
कार्यशाला के दौरान प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम वीरकर ने आदर्श विद्यालयों तथा बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) अभियान पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया।
उन्होंने सघन नामांकन अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्रत्येक बच्चा समय पर विद्यालय से जुड़ सके। इसके लिए ‘टोला सेवक’ और ‘तालीमी मरकज’ के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया गया।
कार्यशाला के एक सत्र में जनगणना निदेशक रंजिता ने स्व-गणना प्रक्रिया पर संक्षिप्त और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया, जिसमें इसके तकनीकी पहलुओं और नागरिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया गया।
भाषा कैलाश
धीरज
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