पटना, 24 जनवरी (भाषा) अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)-पटना के मेडिकल बोर्ड ने शनिवार को कहा कि नीट अभ्यर्थी की हाल में हुई मौत के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अभी तक सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं।
बोर्ड ने संबंधित पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य परिस्थितियों की समीक्षा करने के बाद यह बात कही।
जहानाबाद की 18 वर्षीय छात्रा इस महीने की शुरुआत में पटना के चित्रगुप्त नगर में स्थित एक निजी छात्रावास में बेहोश पाई गई थी। वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ की तैयारी के लिए छात्रावास में रह रही थी। कई दिन तक कोमा में रहने के बाद 11 जनवरी को एक निजी अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई। उसके परिवार ने छात्रा के यौन उत्पीड़न और अधिकारियों पर मामले को दबाने का आरोप लगाया था।
मेडिकल बोर्ड के प्रमुख डॉ. बिनय कुमार (फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी के प्रोफेसर, एम्स, पटना) ने शनिवार को यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘एसआईटी ने अभी तक हमें मामले से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं। सभी दस्तावेज मिलने के बाद ही हम कोई निष्कर्ष निकाल सकेंगे या मामले पर अपनी राय दे सकेंगे।’’
कुमार ने कहा, ‘‘एसआईटी की ओर से बोर्ड को उपलब्ध कराए गए दस्तावेज पर्याप्त नहीं हैं…हमें अभी भी कुछ और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रतीक्षा है। एसआईटी मामले की जांच कर रही है और मेडिकल बोर्ड ने भी दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।’’
हालांकि, उन्होंने उन दस्तावेजों के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया, जो विशेष जांच टीम (एसआईटी) की ओर से अभी तक मेडिकल बोर्ड को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
कुमार ने कहा, ‘‘बोर्ड में एम्स के विभिन्न विभागों के पांच वरिष्ठ चिकित्सक शामिल हैं…और हम उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। यदि आवश्यकता हुई तो हम बोर्ड में और वरिष्ठ चिकित्सकों को शामिल करेंगे।’’
राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के बाद पटना में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके बाद पुलिस ने छात्रावास के मालिक को गिरफ्तार कर लिया।
शुरुआती चिकित्सा जांच में पता चला कि मौत नींद की गोलियां ज्यादा मात्रा में खाने से हुई और वह टाइफाइड से भी पीड़ित थी। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि घटना के पीछे ‘‘यौन हिंसा की आशंका’’ से इनकार नहीं किया जा सकता।
लड़की के परिवार ने मारपीट और यौन शोषण का आरोप लगाया, लेकिन पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इससे इनकार किया।
पटना पुलिस ने 13 जनवरी को जारी एक बयान में दावा किया था, ‘‘चिकित्सकों को यौन उत्पीड़न के कोई संकेत नहीं मिले और उन्होंने बताया कि उसने ज्यादा मात्रा में नींद की गोलियां खाई थीं और वह टाइफाइड से पीड़ित थी।’’
भाषा आशीष जोहेब
जोहेब