Vande Bharat/Image Credit: IBC24.in
Vande Bharat: नई दिल्ली: भारतीय संसदीय इतिहास में मंगलवार का दिन बेहद अहम रहा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष की ओर से पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया गया है। 50 से ज्यादा सांसदों के समर्थन के बाद अब सदन में (Vande Bharat) इस पर 10 घंटे की मैराथन बहस छिड़ गई है।
लोकसभा में मंगलवार को नजारा तब बदल गया जब कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष का आरोप सीधा है-सदन की कार्यवाही में पक्षपात। गोगोई ने सरकार और स्पीकर को घेरते हुए तीन बड़े आरोप लगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को बोलने से रोका जाता है, बार-बार रूल बुक दिखाई जाती है, (Vande Bharat) जबकि सत्ता पक्ष को सदन में प्रतिबंधित किताबें दिखाने की भी छूट है।
Vande Bharat: सदन में हंगामा तब और बढ़ गया जब डिप्टी स्पीकर के पद को लेकर सवाल उठे। विपक्ष ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि, जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव हो, तो वे सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते, लेकिन सवाल ये है कि जब 17वीं और 18वीं लोकसभा में कोई डिप्टी स्पीकर चुना ही नहीं गया, तो चेयर पर कौन बैठेगा? (Vande Bharat) बीजेपी की ओर से निशिकांत दुबे और किरेन रिजिजू ने मोर्चा संभाला और साफ किया कि पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल के पास सदन चलाने की पूरी शक्ति है।
बहस के दौरान जुबानी तीर भी खूब चले। गौरव गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को सबसे ज्यादा टोकने वाला मंत्री बताया, तो गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि, रिजिजू ने टोका जरूर है, लेकिन देश ने इतना गैर-जिम्मेदार विपक्ष भी पहले कभी नहीं देखा। अब देखना होगा क्या विपक्ष इस प्रस्ताव के (Vande Bharat) जरिए सरकार को घेरने में कामयाब होगा या आंकड़ों के खेल में सरकार फिर बाजी मार ले जाएगी?
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