पटना, छह जनवरी (भाषा) बिहार के ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार जलवायु परिवर्तन की चुनौती को केवल एक सरकारी कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है।
उन्होंने कहा कि बदलते मौसम, घटते जलस्तर और हरित क्षेत्र में आ रही कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
बापू टावर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि यह मंच सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह संदेश देने का प्रयास है कि पर्यावरण संरक्षण अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता बन चुका है।
इस कार्यक्रम में जल-जीवन-हरियाली अभियान से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी और जीविका दीदी भी मौजूद रहीं, जिन्हें इस अभियान की जमीनी ताकत माना जाता है।
श्रवण कुमार ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान के माध्यम से सरकार लोगों से भावनात्मक और सामाजिक अपील कर रही है।
उन्होंने सुझाव दिया कि लोग अपने बच्चों, माता-पिता के जन्मदिन या किसी भी पर्व के अवसर पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं। यदि यह परंपरा बन जाए तो राज्य का हरित आवरण तेजी से बढ़ सकता है और 15 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
मंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जूझ रही है, जिसके कारण कहीं असमय बारिश हो रही है तो कहीं भीषण गर्मी और जल संकट जैसे हालात सामने आ रहे हैं। ऐसे में जल, जीवन और हरियाली को एक-दूसरे से जोड़कर देखने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहली बार सत्ता में आए थे, तब बिहार का हरित आवरण महज नौ प्रतिशत था, जो आज बढ़कर 15 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। यह सरकार की नीतियों और जनता के सहयोग का परिणाम है, लेकिन अभी लक्ष्य बाकी है।
उन्होंने जल-जीवन-हरियाली अभियान को मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजना बताते हुए कहा कि इसे सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रखा गया है। नदियों की सफाई, जल स्रोतों का संरक्षण, पौधारोपण और पर्यावरणीय संतुलन जैसे कार्य जमीन पर दिखाई दे रहे हैं।
श्रवण कुमार ने बताया कि राज्य के 15 विभागों के आपसी समन्वय से इस परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है, ताकि इसका लाभ प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक पहुंचे।
इस कार्यक्रम के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पूछे गए सवाल पर श्रवण कुमार ने कहा कि यदि मंत्रिमंडल में जगह खाली है तो विस्तार होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका फैसला मुख्यमंत्री को करना है कि वह कब और कैसे विस्तार करेंगे।
भाषा
कैलाश
रवि कांत