मिथिला चित्रकला को वैश्विक पहचान दिलाने में टोकियो हासेगावा का योगदान अविस्मरणीय: मंत्री

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मिथिला चित्रकला को वैश्विक पहचान दिलाने में टोकियो हासेगावा का योगदान अविस्मरणीय: मंत्री

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  • Publish Date - June 19, 2026 / 10:16 PM IST,
    Updated On - June 19, 2026 / 10:16 PM IST

पटना, 19 जून (भाषा) बिहार के कला एवं संस्कृति विभाग ने शुक्रवार को पटना संग्रहालय में जापान के प्रख्यात कला संरक्षक और मिथिला चित्रकला के वैश्विक संवाहक टोकियो हासेगावा के सम्मान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया।

इस अवसर पर मिथिला चित्रकला से जुड़े अपने दशकों पुराने अनुभव साझा करते हुए हासेगावा ने कहा कि मिथिला चित्रकला केवल एक कला शैली नहीं, बल्कि बिहार की संस्कृति, लोकजीवन और परंपराओं का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण टोकियो हासेगावा और उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत ‘स्टोन म्यूजिक’ रहा। पत्थरों से उत्पन्न ध्वनियों पर आधारित इस अनूठी संगीत प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

उल्लेखनीय है कि हासेगावा ने जापान के निइगाता प्रांत के टोकामाची नगर में मिथिला चित्रकला संग्रहालय की स्थापना 1982 में की थी। यह संग्रहालय दुनिया में मिथिला चित्रकला के सबसे बड़े संग्रहों में से एक माना जाता है। हासेगावा ने मिथिला कला को केवल संग्रहित नहीं किया, बल्कि कलाकारों को जापान आमंत्रित कर उनके कार्यों को वैश्विक मंच भी प्रदान किया। उनकी वजह से बिहार की यह लोककला भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक सेतु बन गई।

कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि मिथिला चित्रकला को वैश्विक पहचान दिलाने में टोकियो हासेगावा का योगदान ऐतिहासिक और अविस्मरणीय है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1980 में मिथिला चित्रकला से प्रभावित होकर हासेगावा जापान से मधुबनी पहुंचे थे और वहां के कलाकारों के साथ मिलकर इस कला को विश्व पटल पर स्थापित करने का संकल्प लिया था।

मंत्री ने कहा कि उनके अथक प्रयासों के कारण मिथिला चित्रकला को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और बिहार की इस लोककला का गौरव विश्वभर में बढ़ा है।

कार्यक्रम में कला, संस्कृति और साहित्य जगत से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

भाषा कैलाश

शफीक

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