Arshad Madani Hindu Rahstra: ‘हिन्दू राष्ट्र का सपना देखने वाले नेपाल से सबक लें, इस्लाम का चिराग कभी नहीं बुझ सकता’ : अरशद मदनी

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Arshad Madani Hindu Rahstra: अरशद मदनी ने आखिर में लिखी कि, "मौजूदा हालात से निराश होने की आवश्यकता नहीं है। एक दिन ऐसा अवश्य आएगा जब अत्याचार का अंत होगा और यह देश फिर से प्रेम, सद्भाव और न्याय के रस्ते में आगे बढ़ेगा।"

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  • Publish Date - February 7, 2026 / 10:14 PM IST,
    Updated On - February 7, 2026 / 10:15 PM IST

Arshad Madani Hindu Rahstra x post || Image- Free Press Journal File

HIGHLIGHTS
  • हिन्दू राष्ट्र विचार पर मदनी का हमला
  • नेपाल के उदाहरण से दी चेतावनी
  • संविधान और सेक्युलरिज़्म की वकालत

नई दिल्ली: हिन्दू राष्ट्र की मांग और अल्पसंख्यकों के खिलाफ सरकार के रवैय्ये से नाराज जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के मुखिया अरशद मदनी ने फिर से दावा किया है कि, वह और उनका संगठन संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए हर सम्भव प्रयास करेगा। (Arshad Madani Hindu Rahstra) उन्होंने अपने ‘एक्स’ पोस्ट में हिन्दू राष्ट्र का सपना देखने को वालो को नेपाल से सीख की नसीहत दी है।

“लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हो” : मदनी

उन्होंने लिखा, “नफ़रत के सौदागर और हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वालों को नेपाल से सबक लेना चाहिए। एक दिन ऐसा भी अवश्य आएगा जब ज़ालिमों के गले में ज़ंजीरें होंगी और देश एक बार फिर प्यार, मोहब्बत और इंसाफ़ के साये (रास्ते) में तरक़्क़ी करेगा। सांप्रदायिक शक्तियाँ और कुछ संगठन हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना देख रहे हैं, जबकि उन्हें अपने पड़ोसी देश नेपाल के इतिहास से सीख लेनी चाहिए। हाल के समय में नेपाल में भी इसी तरह की विचारधारा रखने वालों ने हिंदू राष्ट्र स्थापित किया था, लेकिन अंततः वह व्यवस्था समाप्त हो गई और वहाँ लोकतांत्रिक संविधान के तहत एक नई व्यवस्था अस्तित्व में आई। इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में किसी भी देश की वास्तविक प्रगति, स्थिरता और जनकल्याण तभी संभव है जब वहाँ लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हो, न कि किसी एक धर्म या विचारधारा को राष्ट्र पर थोपकर।”

‘इस्लाम का यह चिराग कभी बुझ नहीं सकता’ : मदनी

उन्होंने आगे लिखा, “सांप्रदायिक तत्वों की देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोई भी साज़िश सफल नहीं हो पाएगी। सेक्युलरिज़्म और भारतीय संविधान की रक्षा के लिए जमीयत उलमा-ए-हिंद अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेगी। इतिहास बताता है कि जो क़ौम अपनी पहचान, संस्कृति और धर्म के साथ जीना चाहती है, उसे कुर्बानियाँ देनी पड़ती हैं। (Arshad Madani Hindu Rahstra) सांप्रदायिक ताकतें इस्लाम और मुसलमान दोनों को मिटाने के प्रयास में हैं, लेकिन शायद उन्हें यह नहीं मालूम कि इस्लाम का यह चिराग कभी बुझ नहीं सकता और जिन्होंने इसे बुझाने की कोशिश की, वे स्वयं मिट गए। हम एक जीवित क़ौम हैं, और जीवित क़ौमें निराश होने के बजाय अपनी समझ, दूरदर्शिता और रणनीति से सफलता की नई कहानी लिखती हैं।”

अरशद मदनी ने आखिर में लिखी कि, “मौजूदा हालात से निराश होने की आवश्यकता नहीं है। एक दिन ऐसा अवश्य आएगा जब अत्याचार का अंत होगा और यह देश फिर से प्रेम, सद्भाव और न्याय के रस्ते में आगे बढ़ेगा।”

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Q1. अरशद मदनी ने हिन्दू राष्ट्र पर क्या कहा?

उन्होंने इसे संविधान विरोधी बताया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया।

Q2. मदनी ने नेपाल का जिक्र क्यों किया?

नेपाल में हिन्दू राष्ट्र खत्म होने का उदाहरण देकर चेतावनी देने के लिए।

Q3. जमीयत उलेमा-ए-हिंद का रुख क्या है?

संगठन संविधान, सेक्युलरिज़्म और अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा का दावा करता है।