Key Announcements for Farmers || Image- IBC24 News File
रायपुर: छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने इस वर्ष ₹1.72 लाख करोड़ का ‘संकल्प बजट’ प्रस्तुत किया है, जिसे सर्वसमावेशी और जनकल्याणकारी बजट के रूप में देखा जा रहा है। यह बजट समाज के हर वर्ग-महिलाओं, युवाओं, छात्र-छात्राओं, बुजुर्गों, उद्यमियों, व्यापारियों, मजदूरों, सरकारी कर्मचारियों और अन्य नौकरीपेशा लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। (Key Announcements for Farmers) सरकार ने विभिन्न योजनाओं और नई घोषणाओं के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा, रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वरोजगार और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा है, ताकि प्रदेश के समग्र विकास को नई गति मिल सके।
इस बजट का प्रमुख फोकस कृषि क्षेत्र और किसानों की आय में वृद्धि पर केंद्रित है। साय सरकार ने खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से ‘कृषक उन्नति योजना’ के लिए ₹10,000 करोड़ का प्रावधान किया है। इसके माध्यम से किसानों को आर्थिक मजबूती देने, उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने और बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस रोडमैप तैयार किया गया है। आइए जानते हैं कि सरकार ने अपने इस संकल्प बजट में किसानों के लिए कौन-कौन सी बड़ी घोषणाएं और राहतकारी प्रावधान किए हैं, जो प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ पहुंचा सकते हैं।
कृषक उन्नति योजना छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य राज्य के किसानों की आय बढ़ाना, कृषि उत्पादकता में सुधार करना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। इस बार के बजट में सरकार ने इस योजना के लिए 10000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। (Key Announcements for Farmers) यह योजना विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि वे आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई सुविधाओं और बाजार व्यवस्था का लाभ उठा सकें। सरकार का लक्ष्य खेती को पारंपरिक पद्धतियों से आगे बढ़ाकर आधुनिक, तकनीक-आधारित और टिकाऊ कृषि प्रणाली की ओर ले जाना है।
इस योजना के तहत उन्नत बीज, आधुनिक कृषि यंत्रों और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों जैसे ड्रिप एवं स्प्रिंकलर को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन संभव हो सके। साथ ही नई सिंचाई परियोजनाओं और बैराज निर्माण के माध्यम से अधिक कृषि भूमि को सिंचित क्षेत्र में शामिल करने की योजना है, ताकि किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम हो। कृषि विविधीकरण को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे किसान धान जैसी पारंपरिक फसलों के अलावा बागवानी, दलहन, तिलहन, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।
इसके अतिरिक्त किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए समर्थन मूल्य खरीद व्यवस्था को मजबूत करने और बाजार तक सीधी पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। भूमिहीन कृषि परिवारों और लघु किसानों को विशेष सहायता प्रदान कर उनकी आजीविका सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा। कुल मिलाकर, यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, कृषि आधारित रोजगार बढ़ाने और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ आर्थिक सुरक्षा देने के लिए केंद्र सरकार की प्रमुख बीमा योजना है, जिसे छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार के सहयोग से लागू किया जाता है। सरकार ने इस बार के बजट में बीमा योजना के लिए 820 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य खेती को जोखिममुक्त बनाना, किसानों की आय को स्थिर रखना और आपदा के समय उन्हें त्वरित राहत प्रदान करना है।
छत्तीसगढ़ में यह योजना खरीफ और रबी दोनों मौसमों की अधिसूचित फसलों पर लागू होती है। किसान नाममात्र का प्रीमियम भरते हैं—खरीफ फसलों के लिए 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए 5% तक—जबकि शेष प्रीमियम राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करती हैं। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है और अधिक से अधिक किसान बीमा सुरक्षा के दायरे में आते हैं।
योजना के तहत सूखा, बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, चक्रवात, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसल को हुए नुकसान पर मुआवजा दिया जाता है। कुछ परिस्थितियों में बुवाई न हो पाने या कटाई के बाद 14 दिनों तक प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान को भी कवर किया जाता है। नुकसान का आकलन फसल कटाई प्रयोग (Crop Cutting Experiments) और अब डिजिटल तकनीकों के माध्यम से किया जाता है, जिससे पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित हो सके।
छत्तीसगढ़ में इस योजना का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि राज्य का बड़ा हिस्सा वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है। आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के किसानों के लिए यह योजना जोखिम कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। फसल खराब होने की स्थिति में मिलने वाला बीमा दावा किसानों को कर्ज के बोझ से बचाने और अगली फसल की तैयारी के लिए आर्थिक आधार प्रदान करता है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना छत्तीसगढ़ में किसानों की आय सुरक्षा, कृषि स्थिरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सहारा है। यदि समय पर सर्वे और दावा भुगतान सुनिश्चित हो, तो यह योजना किसानों के लिए संकट के समय में वास्तविक राहत साबित हो सकती है।
यह छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य उन परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है जो खेती पर निर्भर तो हैं, लेकिन उनके पास अपनी कृषि भूमि नहीं है। (Key Announcements for Farmers) ये परिवार अक्सर दूसरों के खेतों में मजदूरी करके जीवनयापन करते हैं और आय का स्थायी स्रोत नहीं होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में रहते हैं। सरकार ने अपने संकल्प बजट में इस योजना के लिए 600 करोड़ आबंटित किये है।
इस योजना के तहत पात्र भूमिहीन कृषि श्रमिक परिवारों को प्रतिवर्ष निर्धारित राशि की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जाती है। यह सहायता राशि परिवार की आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने, दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने और आर्थिक संकट के समय सहारा देने के लिए दी जाती है। योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना ही नहीं, बल्कि समाज के इस कमजोर वर्ग को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान करना भी है।
योजना का लाभ उन परिवारों को मिलता है जिनके पास कृषि योग्य भूमि नहीं है और जिनकी आय का मुख्य स्रोत कृषि मजदूरी है। पात्रता के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार पंजीकरण आवश्यक होता है। सहायता राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे खाते में जमा की जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
इस योजना का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण गरीबी को कम करना, भूमिहीन श्रमिकों की आय स्थिर करना और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में, जहां बड़ी संख्या में लोग कृषि मजदूरी पर निर्भर हैं, यह योजना उनके जीवन स्तर को सुधारने और आर्थिक असमानता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
छत्तीसगढ़ में मतनार और देउरगाँव बैराज जैसी बड़ी सिंचाई परियोजनाएँ राज्य के कृषि ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं। लगभग ₹2,024 करोड़ की लागत से प्रस्तावित इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य सिंचाई का रकबा बढ़ाना, वर्षा पर निर्भरता कम करना और उन क्षेत्रों तक पानी पहुँचाना है जो अब तक सिंचाई सुविधाओं से वंचित रहे हैं।
मतनार बैराज का निर्माण बस्तर अंचल में किया जा रहा है। यह क्षेत्र परंपरागत रूप से वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहा है, जिससे किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहना पड़ता था। बैराज बनने से नदी के पानी का संचयन होगा और नहरों के माध्यम से खेतों तक नियमित जल आपूर्ति संभव होगी। इससे किसानों को धान के अलावा दलहन, तिलहन और सब्जी जैसी दूसरी फसलें लेने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।
इसी प्रकार देउरगाँव बैराज परियोजना का उद्देश्य आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई का दायरा बढ़ाना है। यह बैराज जल संग्रहण और नियंत्रित जल वितरण की सुविधा प्रदान करेगा। इससे न केवल खरीफ, बल्कि रबी सीजन में भी खेती संभव हो सकेगी। जिन गांवों में अब तक ट्यूबवेल या वर्षा जल पर निर्भरता थी, वहां स्थायी सिंचाई स्रोत उपलब्ध होगा।
इन परियोजनाओं से भूजल स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है, क्योंकि सतही जल का उपयोग बढ़ने से भूमिगत जल का दोहन कम होगा। साथ ही, सिंचाई सुविधा बढ़ने से कृषि उत्पादकता में वृद्धि, किसानों की आय में सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर, मतनार और देउरगाँव बैराज जैसी परियोजनाएँ केवल जल संरचनाएँ नहीं हैं, बल्कि वे कृषि विस्तार, बहुफसली प्रणाली, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय संतुलित विकास की आधारशिला साबित हो सकती हैं, खासकर उन इलाकों में जो अब तक विकास की मुख्यधारा से कुछ हद तक दूर रहे हैं।
खाद्य तेल: ऑयल पाम की खेती के लिए केंद्र के अनुदान के अतिरिक्त 150 करोड़ का ‘टॉप अप’ अनुदान।
मिशन मोड: दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के लिए 100 करोड़ और नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल के लिए 90 करोड़।
प्राकृतिक खेती: नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के लिए 40 करोड़ रुपये।
आलू प्रदर्शन विकास योजना: मैनापाट और बगीचा जैसे पठारी क्षेत्रों में आलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई योजना।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 130 करोड़ रुपये का प्रावधान।
पीएम कृषि सिंचाई योजना के लिए 130 करोड़ रुपये का प्रावधान।
ग्रामीण आजीविका सुधारने के लिए डेयरी और मछली पालन पर विशेष ध्यान दिया गया है:
डेयरी समग्र विकास: इसके लिए 90 करोड़ का प्रावधान है, जिसके तहत रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का आधुनिकीकरण होगा।
एक्वा पार्क: कोरबा के हसदेव बांगो जलाशय में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए 5 करोड़ रुपए की लागत से एकीकृत एक्वा पार्क की स्थापना होगी।
पशु संवर्धन: नस्ल सुधार के लिए 8 करोड़ और हरा चारा उत्पादन के लिए 10 करोड़ रुपये।