(Budget 2026/ Image Credit: Pexels)
नई दिल्ली: Union Budget 2026 केंद्रीय बजट 2026 में निवेशकों के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है, जिसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो लोन लेकर शेयर या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। अब तक निवेशकों को राहत मिलती थी क्योंकि वे डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से होने वाली आय पर लिए गए लोन के ब्याज का कुछ हिस्सा टैक्स से घटा सकते थे। लेकिन बजट 2026 के प्रस्ताव के बाद यह सुविधा खत्म होने जा रही है। यानी अब डिविडेंड कमाने के लिए लिया गया लोन टैक्स बचाने में मदद नहीं करेगा।
अभी तक आयकर अधिनियम की धारा 93 के तहत निवेशकों को यह छूट मिलती थी कि वे डिविडेंड या म्यूचुअल फंड यूनिट्स से हुई आय का अधिकतम 20 प्रतिशत तक ब्याज खर्च टैक्स से घटा सकते थे। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी निवेशक को 1 लाख रुपये का डिविडेंड मिला और उसने 25 हजार रुपये ब्याज चुकाया, तो वह 20 हजार रुपये तक की कटौती ले सकता था। यह नियम खास तौर पर उन निवेशकों के लिए फायदेमंद था जो लोन लेकर लॉन्ग टर्म इनकम बनाने की रणनीति अपनाते थे।
बजट दस्तावेजों के अनुसार, अब डिविडेंड इनकम या म्यूचुअल फंड यूनिट्स से होने वाली आय पर किसी भी तरह का ब्याज खर्च टैक्स में घटाया नहीं जा सकेगा। आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि चाहे लोन सीधे निवेश के लिए लिया गया हो, उस पर दिया गया ब्याज अब टैक्स छूट के दायरे में नहीं आएगा। यह नियम सभी टैक्सपेयर्स पर लागू होगा, चाहे वे व्यक्तिगत निवेशक हो या कोई अन्य श्रेणी का हो।
इस बदलाव का मतलब है कि कर्ज लेकर निवेश करने की टैक्स एफिशिएंसी कम हो जाएगी। निवेशक जो डिविडेंड इनकम को ध्यान में रखकर लोन लेते थे, उन्हें अब अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने की जरूरत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हाई-लेवरेज निवेश पर ब्रेक लगेगा और निवेशक ज्यादा सतर्क होकर फैसले लेंगे। आने वाले समय में डिविडेंड और म्यूचुअल फंड से कमाई करने वालों के लिए टैक्स प्लानिंग पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
नोट:- शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।