नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) दिल्ली सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में निजी स्कूलों में फीस को विनियमित करने वाला नया कानून शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में लागू नहीं किया जाएगा।
यह बयान न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ के समक्ष दिया गया, जो दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 के कार्यान्वयन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने पीठ को बताया कि मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में यह कानून लागू नहीं किया जाएगा।
पीठ ने कहा, “एस वी राजू द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को देखते हुए… कि यह कानूनी व्यवस्था 2025-26 से लागू नहीं होगी, आगे किसी आदेश की आवश्यकता नहीं है।”
इसने सभी मुद्दों को दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष उठाने के लिए विकल्प दिया, जो 2025 के अधिनियम और उसके बाद के नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।
उच्चतम न्यायालय उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें उच्च न्यायालय के आठ जनवरी के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं भी शामिल हैं, जिसमें यहां के निजी स्कूलों को शुल्क विनियमन समितियों का गठन करने का निर्देश देने वाली अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था, लेकिन ऐसी समितियों के गठन के लिए समयसीमा बढ़ा दी गई थी।
सुनवाई के दौरान, मामले में पेश हुए वकीलों में से एक ने कहा कि उच्च न्यायालय को इस मुद्दे पर जल्द से जल्द फैसला करना चाहिए क्योंकि इसमें कई स्कूल और लाखों बच्चे शामिल हैं।
पीठ ने कहा, “उच्च न्यायालय को इसकी जानकारी है। यह मानने की कोई आवश्यकता नहीं है कि उच्च न्यायालय इससे अनभिज्ञ है और केवल हमें ही इसकी जानकारी है।”
जब एक अन्य वकील ने कहा कि इस मामले की सुनवाई 31 मार्च से पहले उच्च न्यायालय में होनी चाहिए, तो पीठ ने कहा कि पक्षकार उच्च न्यायालय के समक्ष याचिकाओं के शीघ्र निस्तारण के लिए अनुरोध कर सकते हैं।
याचिकाओं पर 19 जनवरी को सुनवाई करते हुए, उच्चतम न्यायालय ने कानून को लागू करने में दिल्ली सरकार द्वारा चुने गए समय को लेकर सवाल उठाए थे।
भाषा प्रशांत नेत्रपाल
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