सेबी को भेजे थे 400 जीबी दस्तावेज, नियामक ढूंढ नहीं पाया: राजेश एक्सपोर्ट्स
सेबी को भेजे थे 400 जीबी दस्तावेज, नियामक ढूंढ नहीं पाया: राजेश एक्सपोर्ट्स
(लक्ष्मी देवी ऐरे)
नयी दिल्ली, सात जून (भाषा) सोना रिफाइनिंग एवं आभूषण विनिर्माण से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स ने रविवार को कहा कि वह बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को पहले ही 300 से 400 गीगाबाइट (जीबी) के दस्तावेज सौंप चुका है, लेकिन उसका मानना है कि नियामक सही फाइलों को ढूंढ नहीं पाया है।
कंपनी ने कहा कि वह इस मामले को सुलझाने के लिए मांगे गए सभी दस्तावेज 15 दिनों के भीतर फिर से जमा करेगी।
कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन राजेश मेहता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि सेबी का तीन जून का अंतरिम आदेश, जिसमें वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 15.15 लाख करोड़ रुपये के कथित राजस्व वृद्धि का आरोप लगाया गया है, एक बुनियादी लेखांकन त्रुटि पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि नियामक ने कंपनी की कर पूर्व आय (ईबीआईटीडीए) को राजस्व मान लिया है।
उन्होंने कहा, “हमने उन्हें 300-400 जीबी के दस्तावेज दिए थे, जो लाखों पन्नों में हैं। मुझे लगता है कि वे सही दस्तावेज ढूंढ़ नहीं पाए। पूरी गड़बड़ी वहीं हुई है।”
उन्होंने कहा, “उन्होंने ईबीआईटीडीए को राजस्व मान लिया है। ईबीआईटीडीए यानी सकल लाभ होता है। उन्होंने सकल लाभ को राजस्व मान लिया है। इस संख्या (15.15 लाख करोड़ रुपये) को देखते हुए उन्होंने एक बड़ी गलती की है।”
मेहता ने कथित गलती को समझाने के लिए आभूषण दुकान का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि राजेश एक्सपोर्ट्स जैसे बड़े और कम मुनाफे वाले सोने के कारोबार में अगर कोई ग्राहक दो ग्राम सोना 30,000 रुपये में खरीदता है, तो वह 30,000 रुपये ही कंपनी का राजस्व (बिक्री आय) होता है। उस लेन-देन पर 1,000 रुपये का सकल लाभ (ग्रॉस प्रॉफिट) होता है, जबकि शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) 500 रुपये होता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सेबी ने 30,000 रुपये के वास्तविक राजस्व के बजाय 1,000 रुपये के सकल लाभ को राजस्व के रूप में दर्ज कर लिया।
उन्होंने कहा, “सेबी ने 500 रुपये के शुद्ध लाभ पर कोई टिप्पणी नहीं की है, वह इसे स्वीकार करते हैं। लेकिन वह 1,000 रुपये के ईबीआईटीडीए को राजस्व मानकर उसे गलत तरीके से दिखा रहा है।”
उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से गलतफहमी का मामला है।”
उन्होंने यह भी कहा कि सेबी के अपने अंतरिम आदेश में सावधानीपूर्ण भाषा का उपयोग किया गया है।
उन्होंने बताया, “उसने (सेबी ने) खुद कहा है कि हम मानते हैं, हमें संदेह है कि यह उनका व्यवसाय है। इसलिए इसे स्पष्ट करने की जरूरत है। मूल रूप से यह उतना कठोर मामला नहीं है, जितना इसे प्रस्तुत किया गया है।”
राजस्व बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोप पर मेहता ने कहा कि ऐसी हेरफेर का किसी भी कंपनी के लिए कोई फायदा नहीं होता।
उन्होंने कहा, “कोई भी कंपनी अपने राजस्व को नहीं बढ़ाएगी। अगर कोई कुछ बढ़ाना चाहता है तो वह अपने मुनाफे (बॉटम लाइन) को बढ़ाएगा, ताकि उसे फायदा मिल सके। अगर टॉप लाइन यानी राजस्व को बढ़ाने का आरोप लगाया गया है, तो उसका किसी को कोई लाभ नहीं होता।”
उन्होंने आगे कहा कि कानून के तहत पूरा राजस्व दिखाना अनिवार्य है।
मेहता ने कहा, ‘अगर सेबी हमें अनुमति दे, तो मैं पूरी टॉप लाइन (राजस्व) को हटा दूंगा। लेकिन मैं ऐसा कैसे कर सकता हूं? क्योंकि कानून मुझसे यह दिखाने की मांग करता है कि व्यवसाय में क्या हो रहा है और मैं वही दिखा रहा हूं।’
सेबी के उस आरोप का खंडन करते हुए जिसमें कहा गया था कि कंपनी के कोष बिना पर्याप्त खुलासे के व्यक्तिगत खातों और प्रर्वतकों से जुड़ी संस्थाओं के जरिए भेजे गए।
मेहता ने कहा, “ऐसा बिल्कुल नहीं है। एक भी पैसा किसी भी तरीके से इधर-उधर नहीं किया गया है, और प्रर्वतकों ने एक भी पैसा नहीं लिया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी और उसके प्रर्वतक 100 प्रतिशत कर्जमुक्त हैं और पिछले 40 वर्षों में दुनिया में कहीं भी कभी अपने शेयर गिरवी नहीं रखे गए हैं।
तीन जून के अंतरिम आदेश में आगामी कार्यवाही तक मेहता के कंपनी की प्रतिभूतियों को खरीदने, बेचने या उनमें लेनदेन करने पर भी रोक लगा दी गई है।
इस पर उन्होंने कहा, ‘मैं कभी ट्रेडिंग नहीं करता, और अपने पूरे जीवन में मैंने कभी ट्रेडिंग नहीं की है। इसलिए मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।’
सेबी के आदेश के बाद शेयरों में गिरावट (लोअर सर्किट) पर मेहता ने कहा कि यह उतार-चढ़ाव अस्थायी और बाजार के रुख पर आधारित है।
मामला सुलझते ही शेयरों की कीमतें दोबारा सुधर जाएंगी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि कंपनी नए सिरे से ‘फॉरेंसिक ऑडिट’ के लिए तैयार है और उसके कार्यालय तथा बही-खाते किसी भी समय जांच के लिए खुले हैं।
अंतरिम आदेश को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना पर पूछे जाने पर मेहता ने कहा कि उन्हें सकारात्मक नतीजे की पूरी उम्मीद है।
उन्होंने कहा, “कोई भी सबसे खराब स्थिति नहीं है क्योंकि मुझे सेबी की समझ और निर्णय पर पूरा भरोसा है। जब हम उन्हें स्पष्टिकरण देंगे, तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। मुझे यकीन है कि वे बेहद समझदार लोग हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि वे तथ्यों को देखकर सही आदेश पारित करेंगे।’
शेयरधारकों को दिए संदेश में जिनके निवेश में भारी गिरावट आई है, मेहता ने कहा कि कंपनी ने कोई गलत काम नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि कंपनी के सभी खाते पूरी तरह साफ और पारदर्शी हैं।
मेहता ने भरोसा जताया कि यदि अभी नहीं तो बहुत जल्द ही कंपनी के शेयर फिर से अपनी पुरानी ऊंचाई पर पहुंच जाएंगे।
भाषा
योगेश नरेश
नरेश

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