नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कम से कम 100 उत्पादों की पहचान करने हेतु छह क्षेत्र-विशेष कार्य समूहों का गठन किया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा, ‘‘ इसका उद्देश्य इन उत्पादों के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना है।’’
ये समूह संबंधित वस्तुओं की सूची पर चर्चा करेंगे और उनके द्वारा तैयार अंतिम सूची तीन सप्ताह के भीतर मंत्रिमंडल सचिवालय को सौंपी जाएगी।
ये छह समूह औषधि, जैव-प्रौद्योगिकी एवं चिकित्सा उपकरण, रसायन व पेट्रो-रसायन, वस्त्र व जूते चप्पल, पूंजीगत वस्तुएं, मोटर वाहन व इलेक्ट्रिक वाहन, उन्नत पूंजीगत वस्तुएं, ऊर्जा, निर्माण उपकरण व अवसंरचना तथा रक्षा व वैमानिकी (केवल नागरिक उपयोग वाले उत्पादों के लिए) और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों पर केंद्रित हैं।
इन समूहों में वाणिज्य, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी), नीति आयोग, औषधि, आर्थिक मामलों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रसायन, वस्त्र, भारी उद्योग, बंदरगाह एवं नौवहन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी, सड़क परिवहन, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और तेल मंत्रालयों/विभागों के सदस्य शामिल हैं।
इन समूहों की अध्यक्षता डीपीआईआईटी के सचिव करेंगे। ये समूह ऐसे उत्पादों की पहचान करेंगे जो या तो भारत में निर्मित नहीं होते या देश की जरूरतों के अनुसार पर्याप्त मात्रा में उत्पादित नहीं हो रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों के लिए विनिर्माण का विस्तार करना है।
यह कदम विदेशी मुद्रा के खर्च को कम करने के लिए भी उठाया गया है, क्योंकि इससे भारतीय मुद्रा पर दबाव पड़ रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का आयात 7.5 प्रतिशत बढ़कर 775 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। भारत द्वारा प्रमुख रूप से आयात किए गए उत्पादों में कच्चा तेल (174 अरब डॉलर), वनस्पति तेल (19.5 अरब डॉलर), उर्वरक (16 अरब डॉलर), अयस्क एवं खनिज (14.12 अरब डॉलर), कोयला, कोक एवं ब्रिकेट (27.9 अरब डॉलर), रसायन (लगभग 28 अरब डॉलर), कृत्रिम रेजिन व प्लास्टिक सामग्री (22.75 अरब डॉलर), मशीनरी (61.73 अरब डॉलर), परिवहन उपकरण (34.75 अरब डॉलर) और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं (116.2 अरब डॉलर) शामिल हैं।
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