एआई ‘तीव्र प्रगति’ का युग ला रही : गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई

एआई ‘तीव्र प्रगति’ का युग ला रही : गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई

एआई ‘तीव्र प्रगति’ का युग ला रही : गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई
Modified Date: February 19, 2026 / 10:58 am IST
Published Date: February 19, 2026 10:58 am IST

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) गूगल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई ने कृत्रिम मेधा (एआई) को ‘‘तीव्र प्रगति’’ के युग की शुरुआत करने वाली प्रौद्योगिकी करार दिया है।

पिचाई ने बृहस्पतिवार को कहा कि इसमें नई वैज्ञानिक खोजों के द्वार खोलने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को विकास के चरणों को पार कर आगे बढ़ने में मदद करने की क्षमता है।

उन्होंने साथ ही कहा कि कृत्रिम मेधा जितना किसी भी प्रौद्योगिकी ने उन्हें “बड़े सपने देखने” के लिए प्रेरित नहीं किया।

‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ को संबोधित करते हुए पिचाई ने कहा कि डिजिटल खाई को कृत्रिम मेधा की खाई में बदलने नहीं दिया जा सकता और इसके लिए संगणन (कंप्यूटिंग) अवसंरचना तथा संपर्क व्यवस्था में निवेश जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा कार्यबल को निश्चित रूप से नया रूप देगी। कुछ भूमिकाओं को स्वचालित करेगी, कुछ को विकसित करेगी और पूरी तरह नए रोजगार सृजित करेगी।

प्रौद्योगिकी अपनाने में भरोसे को आधार बताते हुए पिचाई ने सरकार, कंपनियों और नवोन्मेषकों सहित सभी हितधारकों से मिलकर काम करने का आह्वान किया, ताकि कृत्रिम मेधा के पूर्ण लाभ हासिल किए जा सकें।

उन्होंने कहा, “हमने ‘सिंथ आईडी’ जैसे उपकरण विकसित किए हैं, जिनका उपयोग दुनिया भर में पत्रकार और नागरिक तथ्य-जांचकर्ता सामग्री की प्रामाणिकता की पुष्टि करने के लिए करते हैं। चाहे हम कितने भी जिम्मेदार हों, यदि हम साथ मिलकर काम नहीं करेंगे तो कृत्रिम मेधा के पूर्ण लाभ हासिल नहीं कर पाएंगे।”

पिचाई ने कहा कि सरकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा, “इसमें नियामक के रूप में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश तय करना और प्रमुख जोखिमों का समाधान करना शामिल है। साथ ही नवोन्मेषक के रूप में भी, जहां कृत्रिम मेधा को सार्वजनिक सेवाओं में लाकर लोगों के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है और लोगों व व्यवसायों के लिए इन प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाने में मदद मिल सकती है।”

भाषा निहारिका रंजन

रंजन


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