नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) भारत में फैली 64 लाख किलोमीटर लंबी सड़कों पर होने वाली जानलेवा दुर्घटनाओं को कम करने में अब कृत्रिम मेधा (एआई) का भी बखूबी इस्तेमाल किया जा रहा है।
वर्ष 2024 में सड़क हादसों में 1,77,177 लोगों की मौत का आंकड़ा मानवीय निगरानी की सीमाओं को स्पष्ट करता है। प्रतिदिन औसतन 485 लोगों की मौत का आंकड़ा बताता है कि भारतीय सड़कों की जटिलता, मिश्रित यातायात और अप्रत्याशित ड्राइविंग व्यवहार इसे विश्व की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक बनाते हैं।
यद्यपि, ‘विजन-आधारित एआई’ की नयी लहर अब इस परिदृश्य को ‘फॉरेंसिक विश्लेषण’ से हटाकर ‘वास्तविक समय में हस्तक्षेप’ की ओर ले जा रही है। यह प्रौद्योगिकी भारतीय सड़कों की अव्यवस्था को बाधा के स्थान पर समृद्ध ‘प्रशिक्षण डेटा’ के रूप में प्रयुक्त कर रही है।
नेट्राडाइन के कार्यकारी उपाध्यक्ष (इंजीनियरिंग) तेजा गुडेना ने कहा, ‘ये एआई कैमरे ‘कोचिंग सिस्टम’ के रूप में कार्य करते हैं जो चालक के व्यवहार का वास्तविक समय में विश्लेषण करते हैं। ये प्रणालियां असुरक्षित दूरी पर वाहन चलाना, लेन का उल्लंघन और मोबाइल के उपयोग जैसे प्रतिरूपों को पहचानती हैं। जोखिम बढ़ने पर प्रणाली केबिन के भीतर तत्काल चेतावनी (अलर्ट) जारी करती है, जिसका उद्देश्य दंड देना नहीं बल्कि समय रहते हस्तक्षेप करना है।’
पारंपरिक कैमरों के विपरीत, यह प्रणाली पलकों के झपकने की आवृत्ति जैसे सूक्ष्म शारीरिक संकेतों को पहचानकर झपकी आने से पूर्व ही चालक को सचेत कर देती है।
आंकड़ों के अनुसार, इस प्रौद्योगिकी के उपयोग से ‘हिताची कैश मैनेजमेंट’ जैसी कंपनियों ने दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत की कमी दर्ज की है। साथ ही, झपकी लेते हुए गाड़ी चलाने की घटनाओं में भी 74 प्रतिशत की गिरावट आई है।
वर्तमान में यह प्रौद्योगिकी 3,000 से अधिक व्यावसायिक वाहनों के बेड़े में विस्तारित हो रही है। इसका लक्ष्य समस्त व्यावसायिक गतिशीलता के लिए एक व्यापक सुरक्षा कवच प्रदान करना है, जिसे केवल मानवीय निगरानी द्वारा प्राप्त करना संभव नहीं है।
भाषा सुमित प्रेम
प्रेम