‘एआई वॉशिंग’ से पूंजी बाजार में लोगों का भरोसा कम होने का जोखिमः सेबी सदस्य

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'एआई वॉशिंग' से पूंजी बाजार में लोगों का भरोसा कम होने का जोखिमः सेबी सदस्य

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  • Publish Date - February 23, 2026 / 09:49 PM IST,
    Updated On - February 23, 2026 / 09:49 PM IST

मुंबई, 23 फरवरी (भाषा) बाजार नियामक सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने सोमवार को ‘एआई वॉशिंग’ यानी कृत्रिम मेधा (एआई) के नाम पर बढ़ा-चढ़ाकर दावे करने की प्रवृत्ति को लेकर आगाह करते हुए कहा कि इससे पूंजी बाजार में लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।

सिंह ने भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) कोझिकोड और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि कुछ बाजार प्रतिभागी एआई के उपयोग से असाधारण रिटर्न देने के अतिरंजित दावे कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावे या चुनिंदा खुलासे यानी कथित ‘एआई वॉशिंग’ से बाजार गुमराह हो सकता है और भरोसा कमजोर हो सकता है।”

सिंह ने यह स्वीकार किया कि एआई शिक्षा, शोध और पहुंच बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम है, लेकिन ‘विश्वसनीय दिखने वाली गलत सूचना’ बड़े पैमाने पर तैयार करने की इसकी क्षमता को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के सदस्य ने कहा कि बाजार मूल्य सृजन में वित्तीय पूंजी से बौद्धिक पूंजी की ओर ऐतिहासिक बदलाव दिख रहा है। ऐसे में सूचना देने की प्रणाली की समीक्षा जरूरी है ताकि एल्गोरिद्म के उपयोग, मानव पूंजी की क्षमता और सामाजिक प्रभाव जैसे अमूर्त पहलुओं को भी ठीक ढंग से दर्शाया जा सके।

सिंह ने कहा, “ऐसा नहीं करने तक हम भविष्य की दिशा तय करने के लिए अतीत के नक्शे का इस्तेमाल कर रहे होंगे।”

उन्होंने कहा कि पारदर्शिता की कमी, हेरफेर, छिपे हुए हितों के टकराव या जानबूझकर भ्रम पैदा करने के कारण किसी भी व्यक्ति या निवेशक को व्यवस्थागत स्तर पर नुकसान की स्थिति में नहीं डाला जाना चाहिए।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय