नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को ‘राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) 2.0’ जारी की। इसमें पांच साल के भीतर 10 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, एनएमपी 2.0 के तहत केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों की परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण से वित्त वर्ष 2025-26 से लेकर 2029-30 के दौरान कुल 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने की संभावित क्षमता का आकलन किया गया है। इसमें 5.8 लाख करोड़ रुपये निजी क्षेत्र के निवेश के रूप में शामिल हैं।
नीति आयोग ने ‘एनएमपी 1.0’ को वर्ष 2021 में 2022-25 की अवधि के लिए शुरू किया था। इसमें चालू सार्वजनिक अवसंरचना परिसंपत्तियों को निजी क्षेत्र को पट्टे पर देकर छह लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया था। इस चरण में 5.3 लाख करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं जो लक्ष्य का लगभग 89 प्रतिशत है।
सीतारमण ने कहा कि एनएमपी 2.0 ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप है और अवसंरचना विकास को गति देकर आर्थिक वृद्धि को बल देगी। उन्होंने मंत्रालयों से प्रक्रिया सरलीकरण और मानकीकरण पर जोर देने को कहा, ताकि परिसंपत्ति का मौद्रीकरण निर्बाध और समयबद्ध तरीके से हो सके।
क्षेत्रवार लक्ष्यों के तहत राजमार्ग से 4.42 लाख करोड़ रुपये, बिजली से 2.77 लाख करोड़ रुपये, बंदरगाह से 2.64 लाख करोड़ रुपये और रेलवे से 2.62 लाख करोड़ रुपये जुटाने का अनुमान है।
इसके अलावा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, नागर विमानन, गोदाम, शहरी अवसंरचना, कोयला, दूरसंचार और पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी परिसंपत्तियों को भी इसमें शामिल किया गया है।
सरकार ने कहा कि परिसंपत्ति मौद्रीकरण से मिलने वाली राशि को नए पूंजीगत व्यय में पुनर्निवेश किया जाएगा, जिससे बजटीय बोझ कम होगा।
बयान के मुताबिक, मंत्रिमंडलीय सचिव की अध्यक्षता में ‘परिसंपत्ति मौद्रीकरण पर सचिवों का प्रमुख समूह’ इस कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करेगा।
मौद्रीकरण के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) रियायतें और अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) जैसे पूंजी बाजार साधनों का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे सार्वजनिक और निजी दोनों पक्षों के लिए मूल्य सृजन सुनिश्चित होने का अनुमान है।
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