मुंबई, 24 मार्च (भाषा) देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति के आधार पर गर्मियों के कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
कंपनी ने साथ ही कहा कि यदि लागत और बढ़ती है तथा उसके कारण हवाई किराये में वृद्धि होती है तो इससे मांग प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतें बढ़ गई हैं और पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र पर लगाए गए प्रतिबंधों से एयरलाइन कंपनियों का परिचालन भी प्रभावित हुआ है।
भारतीय एयरलाइन कंपनियां कुल परिचालन लागत का करीब 40 प्रतिशत विमान ईंधन पर खर्च करती हैं।
इंडिगो के प्रवक्ता ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि कंपनी अप्रैल में शुरू होने वाले घरेलू ग्रीष्मकालीन कार्यक्रम (शेड्यूल) में करीब 2,000 दैनिक उड़ानें संचालित करने की योजना बना रही है।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ इंडिगो का अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम सर्दियों के कार्यक्रम के समान स्तर पर तय किया गया है लेकिन पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर परिचालन का पैमाना बदल सकता है। ईंधन तथा विदेशी मुद्रा से जुड़ी लागत में पहले से ही काफी वृद्धि हो रही है और इनके आगे भी काफी बढ़ने की आशंका है।’’
वर्तमान में तय उड़ानों की संख्या 2025 के ग्रीष्मकालीन कार्यक्रम के लगभग बराबर है, लेकिन यह मौजूदा सर्दियों के कार्यक्रम में निर्धारित उड़ानों से कम है।
इंडिगो को पिछले साल दिसंबर की शुरुआत में बड़े परिचालन व्यवधान के कारण सर्दियों का कार्यक्रम कम करना पड़ा था।
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने 29 मार्च से 24 अक्टूबर तक के लिए घरेलू उड़ानों के ग्रीष्मकालीन कार्यक्रम को मंजूरी दी है।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ हमने बढ़ती लागत के कुछ हिस्से की भरपाई के लिए ईंधन अधिभार लगाया है, लेकिन इसके साथ किराये में और बढ़ोतरी से मांग पर असर पड़ सकता है। मौजूदा परिचालन माहौल बेहद अस्थिर है और कंपनी घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर क्षमता का लगातार आकलन करती रहेगी।’’
इंडिगो ने 14 मार्च से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टिकट पर 425 रुपये से 2,300 रुपये तक का ईंधन अधिभार लगाना शुरू किया है।
एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर भी ईंधन अधिभार वसूल रही हैं।
ईंधन की ऊंची कीमतों के अलावा अचानक हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी से एयरलाइन कंपनियों की परिचालन लागत एवं जटिलताएं भी बढ़ रही हैं।
भाषा निहारिका अजय
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