Narsinghpur Water Crisis Vote Boycott : जल संकट से टूटा सब्र का बांध! 42 गांवों ने एकजुट होकर किया चुनाव बहिष्कार का ऐलान, बोले- पहले पानी, फिर वोट, लगा दिया नेताओं की एंट्री पर बैन

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मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के 42 गांव भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। पानी की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने बड़ा फैसला लेते हुए पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव तक वोट न देने का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नर्मदा का पानी गांवों तक नहीं पहुंचेगा, तब तक चुनाव बहिष्कार जारी रहेगा।

  • Reported By: Pavan Kaurav

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  • Publish Date - May 30, 2026 / 10:01 AM IST,
    Updated On - May 30, 2026 / 10:01 AM IST

Narsinghpur Water Crisis Vote Boycott

HIGHLIGHTS
  • नरसिंहपुर जिले के बिजौरा सहित 42 गांवों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया।
  • ग्रामीणों की मांग है कि गांवों तक नर्मदा का पानी पहुंचाया जाए।
  • नेताओं के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने का भी लिया गया फैसला।

नरसिंहपुर: arsinghpur Water Crisis Vote Boycott :  मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के बिजौरा सहित 42 गांवों में भीषण पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। पानी की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने अब चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक गांवों तक नर्मदा का पानी नहीं पहुंचेगा, तब तक वे पंचायत चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक किसी भी चुनाव में वोट नहीं देंगे। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने नेताओं के गांव में प्रवेश पर भी रोक लगाने का फैसला किया है।

42 गांव जूझ रहे हैं भीषण जल संकट से

दरअसल, नरसिंहपुर जिले के बिजौरा सहित आसपास के 42 गांव इन दिनों गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। हर साल मार्च से जुलाई के बीच यहां हालात और भी खराब हो जाते हैं। गांवों के अधिकांश हैंडपंप सूख चुके हैं, जबकि कई स्थानों पर दूषित पानी निकल रहा है। ऐसे में महिलाएं और बच्चे कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं।

चुनाव बहिष्कार का ऐलान

ग्रामीणों का कहना है कि पानी की यह समस्या वर्षों पुरानी है, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है। लोगों ने अपने स्तर पर एक हजार फीट तक बोरवेल भी करवाए, लेकिन वहां भी पर्याप्त पानी नहीं मिला। लगातार बढ़ती परेशानी के बीच ग्रामीणों ने ग्राम सभा में बड़ा निर्णय लेते हुए चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया।

पंचायत से लोकसभा चुनाव तक नहीं देंगे वोट

ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक गांवों तक नर्मदा का पानी नहीं पहुंचाया जाएगा, तब तक वे पंचायत से लेकर लोकसभा चुनाव तक किसी भी चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। इतना ही नहीं, गांव में नेताओं के प्रवेश पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

” चुनाव के समय सिर्फ वादे “

ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि केवल वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद समस्या जस की तस बनी रहती है। फिलहाल ग्रामीण प्रशासन से पेयजल संकट के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि चुनाव बहिष्कार की चेतावनी और बढ़ते जल संकट के बीच प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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