नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) एशियन पाम तेल अलायंस (एपीओए) ने सोमवार को श्रीलंका के पाम तेल की खेती पर लगे प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने के कदम का स्वागत किया। एपीओए ने कहा कि खेती के ज़िम्मेदार तरीके अपनाकर देश अपनी खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण, दोनों लक्ष्यों को पूरा कर सकता है।
श्रीलंका इस प्रतिबंध को हटाने पर विचार कर रहा है, लेकिन इसके लिए उसे अंतिम मंज़ूरी और टिकाऊपन से जुड़े सुरक्षा उपायों की ज़रूरत होगी।
एपीओए के चेयरमैन अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि प्रति हेक्टेयर पैदावार के मामले में पाम तेल दुनिया की सबसे असरदार वनस्पति तेल वाली फसलों में से एक है। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक और पर्यावरणीय लक्ष्यों के बीच कोई टकराव ज़रूरी नहीं है।
चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘श्रीलंका सरकार का पाम तेल की खेती पर लगे प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने का कदम एक संतुलित और दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।’’ उन्होंने कहा कि असली चुनौती प्रतिबंध लगाने में नहीं, बल्कि विज्ञान, जिम्मेदार शासन और सभी संबंधित पक्षों के सहयोग से टिकाऊपन सुनिश्चित करने में है।
एक बयान में, एपीओए के महासचिव बी.वी. मेहता ने कहा कि कई एशियाई देश टिकाऊपन से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताओं को निभाते हुए खाने के तेल के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहे हैं।
मेहता ने कहा, ‘‘श्रीलंका की नीति में यह बदलाव इस बढ़ती हुई समझ को दिखाता है कि इस क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय बढ़ाने और आर्थिक स्थिरता के लिए टिकाऊ पाम तेल को समाधान का एक हिस्सा बनना ही होगा।’’
एपीओए और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (एसईए) ने कहा कि वे पाम तेल क्षेत्र के जिम्मेदार विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकारों, शोधकर्ताओं और उद्योग से जुड़े सभी पक्षों के बीच बातचीत को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।
भाषा राजेश राजेश अजय
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