शहरों में बेरोजगारी दर जनवरी-मार्च तिमाही में मामूली घटकर 6.6 प्रतिशत पर

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शहरों में बेरोजगारी दर जनवरी-मार्च तिमाही में मामूली घटकर 6.6 प्रतिशत पर

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  • Publish Date - May 11, 2026 / 07:31 PM IST,
    Updated On - May 11, 2026 / 07:31 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) शहरों में बेरोजगारी दर मार्च तिमाही में मामूली घटकर 6.6 प्रतिशत रही है। इससे पिछली तिमाही अक्टूबर-दिसंबर, 2025 में यह 6.7 प्रतिशत थी।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के निश्चित अवधि पर होने वाले श्रमबल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के कुल 5,61,822 व्यक्तियों को शामिल किया गया था।

मार्च तिमाही का अद्यतन आंकड़ा इस श्रृंखला का चौथा आंकड़ा है। अप्रैल-जून, 2025 के बुलेटिन में पहली बार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए अनुमान दिए गए थे।

सर्वेक्षण के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में कुल बेरोजगारी दर में जनवरी-मार्च, 2026 के दौरान पिछली दो तिमाहियों की तुलना में गिरावट का रुख रहा।

मार्च तिमाही में यह 6.6 प्रतिशत रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 6.7 प्रतिशत थी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह मामूली रूप से बढ़कर 4.3 प्रतिशत हो गई जो इससे पहले 4.0 प्रतिशत थी।

ग्रामीण क्षेत्रों में, जनवरी-मार्च, 2026 के दौरान नियमित पारिश्रमिक या वेतन वाले कर्मचारियों की संख्या 15.5 प्रतिशत पर पहुंच गयी, जो पिछली तिमाही में 14.8 प्रतिशत थी।

स्व-रोजगार वाले व्यक्तियों की हिस्सेदारी आलोच्य तिमाही में घटकर 62.5 प्रतिशत हो गई, जो अक्टूबर-दिसंबर, 2025 में 63.2 प्रतिशत थी।

शहरी क्षेत्रों में, विभिन्न स्तरों पर श्रमिकों का वितरण पिछली तिमाही की तुलना में लगभग स्थिर रहा।

रोजगार का क्षेत्रवार वितरण पहले की तरह ही संरचनात्मक प्रतिरूप बताता है। इसमें ग्रामीण कार्यबल मुख्य रूप से प्राथमिक क्षेत्र में और शहरी कार्यबल तृतीयक यानी सेवा क्षेत्र में केंद्रित है।

ग्रामीण क्षेत्रों में, जनवरी-मार्च, 2026 के दौरान कृषि में कार्यरत श्रमिकों की हिस्सेदारी 55.8 प्रतिशत रही, जो पिछली तिमाही के 58.5 प्रतिशत से कम है। वहीं तृतीयक क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी बढ़कर समीक्षाधीन तिमाही में 21.7 प्रतिशत हो गई जो दिसंबर, 2025 की तिमाही में 20.6 प्रतिशत थी।

ग्रामीण क्षेत्रों में खनन और उत्खनन के साथ-साथ द्वितीयक यानी औद्योगिक क्षेत्र में भी मार्च तिमाही में श्रमिकों की संख्या 20.9 प्रतिशत से बढ़कर 22.6 प्रतिशत हो गई। शहरी क्षेत्रों में श्रमिकों का क्षेत्रवार वितरण लगभग स्थिर रहा।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुमानित जनसंख्या आंकड़ों का उपयोग करते हुए, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के श्रमिकों की कुल संख्या का अनुमान लगाया गया है।

देश में जनवरी-मार्च, 2026 के दौरान औसतन 57.4 करोड़ व्यक्ति कार्यरत थे, जिनमें से 40.2 करोड़ पुरुष और 17.2 करोड़ महिलाएं थीं।

अखिल भारतीय स्तर पर, तिमाही अनुमान कुल 5,61,822 व्यक्तियों के सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं।

श्रमबल सहभागिता दर (एलएफपीआर) स्थिर रही। इस आयु वर्ग में कुल एलएफपीआर जनवरी-मार्च, 2026 में 55.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पिछली तिमाही में यह 55.8 प्रतिशत था।

ग्रामीण क्षेत्रों में, इस तिमाही में श्रमबल सहभागिता दर 58.2 प्रतिशत रही, जबकि अक्टूबर-दिसंबर, 2025 में यह 58.4 प्रतिशत थी।

शहरी क्षेत्रों में जनवरी-मार्च, 2026 में यह 50.2 प्रतिशत रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 50.4 प्रतिशत थी।

महिलाओं के मामले में श्रमबल सहभागिता दर लगभग स्थिर रही। जनवरी-मार्च, 2026 में यह 34.7 प्रतिशत रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 34.9 प्रतिशत थी।

इस तिमाही के दौरान, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं में श्रमबल सहभागिता दर 39.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि पिछली तिमाही में यह 39.4 प्रतिशत थी। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह 25.4 प्रतिशत रही, जबकि इससे पिछली तिमाही में यह 25.5 प्रतिशत थी।

कुल श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) जनवरी-मार्च, 2026 में 52.8 प्रतिशत रहा, जबकि अक्टूबर-दिसंबर, 2025 में यह 53.1 प्रतिशत था।

ग्रामीण डब्ल्यूपीआर में मामूली गिरावट आई और यह घटकर 55.7 प्रतिशत हो गया, जो पिछली तिमाही में 56.1 प्रतिशत था। शहरी डब्ल्यूपीआर 47.1 प्रतिशत के मुकाबले 46.9 प्रतिशत पर स्थिर बना रहा।

भाषा रमण अजय

अजय