नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) देश में खुदरा भुगतान के क्षेत्र में एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) एक भरोसेमंद और प्रमुख माध्यम बनकर उभरा है। इसका पता इससे लगता है कि कुल लेनदेन मात्रा में यूपीआई की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही में बढ़कर 86.8 प्रतिशत हो गई जो 2022-23 में 73.6 प्रतिशत थी। जोखिम विश्लेषण और परामर्श कंपनी केयरएज एनालिटिक्स एंड एडवाइजरी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
केयरएज ने कहा कि यूपीआई के विस्तार के साथ अब इस प्रणाली की दीर्घकालिक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसके लिए अधिक मूल्य वाले कुछ व्यापारिक लेनदेन पर लक्षित ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लागू करने जैसे प्रस्तावों पर विचार किया जा रहा है।
केयरएज के अनुसार, यदि एमडीआर दर 0.25 से 0.50 प्रतिशत के बीच रहती है तो इससे करीब 15,000 से 30,000 करोड़ रुपये तक के संभावित सकल राजस्व अवसर पैदा हो सकते हैं। प्रत्येक 0.1 प्रतिशत की एमडीआर से लगभग 6,113 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है।
इस महीने की शुरुआत में संसद ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन पारित किए थे, जिससे सरकार को यूपीआई लेनदेन पर शून्य एमडीआर व्यवस्था में बदलाव करने का अधिकार मिल गया है। संशोधन के अनुसार, उपभोक्ताओं को भुगतान करने पर कोई लेनदेन शुल्क नहीं देना होगा और व्यक्ति से व्यक्ति (पी2पी) लेनदेन पहले की तरह नि:शुल्क जारी रहेंगे।
केयरएज ने कहा कि सीमित संख्या में तय सीमा से अधिक मूल्य वाले व्यापारी लेनदेन पर मामूली एमडीआर लागू किया जा सकता है। एमडीआर तय करने का निर्णय भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अध्यक्षता वाली ‘यूपीआई और सेवा निगरानी समिति’ करेगी।
उसने कहा, ‘‘वास्तविक राजस्व अवसर अंतिम पात्रता मानदंड और एमडीआर दर पर निर्भर करेगा। हालांकि, यह विश्लेषण अधिक मूल्य वाले व्यक्ति-से-व्यापार (पी2एम) लेनदेन से लक्षित राजस्व जुटाने की संभावना दिखाता है, जबकि व्यक्तियों के बीच और कम मूल्य वाले डिजिटल भुगतान को मुफ्त जारी रखा जा सकता है।’’
रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्तियों से व्यापारियों को होने वाले भुगतान (पी2एम) कुल यूपीआई लेनदेन मूल्य का 29 प्रतिशत हिस्सा हैं। इनमें से 67.2 प्रतिशत लेनदेन मूल्य 2,000 रुपये से अधिक है।
इससे पता चलता है कि यह व्यवस्था यूपीआई प्रणाली के अपेक्षाकृत सीमित हिस्से को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
केयरएज ने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक मूल्य वाले पी2एम यूपीआई लेनदेन की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2022-23 के 15.1 प्रतिशत से बढ़कर 2026-27 की पहली तिमाही में 20.1 प्रतिशत हो गई है। यह यूपीआई के जरिये अधिक मूल्य वाले व्यापारी भुगतानों की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।
इस बदलाव से एमडीआर के दायरे में आने वाले लेनदेन का आधार बढ़ेगा और राजस्व सृजन की संभावना बढ़ेगी। हालांकि, इससे व्यापारियों में भुगतान शुल्क को लेकर संवेदनशीलता भी बढ़ सकती है।
केयरएज ने कहा, ‘‘भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन का उद्देश्य ऐसा राजस्व ढांचा तैयार करना है जो लंबे समय तक टिकाऊ हो, डिजिटल भुगतान क्षेत्र में अधिक भागीदारी और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे तथा लेनदेन मात्रा बढ़ने के साथ सब्सिडी पर निर्भरता कम करे।’’
भाषा रमण अजय
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