चावल निर्यात पर प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा के लिए अंकुश के बजाय विनिमयन : भारत

चावल निर्यात पर प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा के लिए अंकुश के बजाय विनिमयन : भारत

चावल निर्यात पर प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा के लिए अंकुश के बजाय विनिमयन : भारत
Modified Date: September 28, 2023 / 08:13 pm IST
Published Date: September 28, 2023 8:13 pm IST

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) भारत ने कहा है कि चावल निर्यात पर लगी रोक अंकुश के बजाय उसका विनियमन है, जो 1.4 अरब लोगों की खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

जिनेवा में 27 सितंबर को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की कृषि समिति की बैठक के दौरान अमेरिका सहित कुछ देशों के एक समूह द्वारा उठाई गई चिंताओं के जवाब में भारत ने यह बात कही।

जिनेवा स्थित अधिकारी ने कहा कि बैठक में भारत ने आयातक देशों में उनकी सरकारों के अनुरोध पर जरूरतमंदों को छूट देकर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत सरकार पहले ही नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (एनसीईएल) के माध्यम से भूटान (79,000 टन), संयुक्त अरब अमीरात (75,000 टन), मॉरीशस (14,000 टन) और सिंगापुर (50,000 टन) को गैर-बासमती चावल के निर्यात की अनुमति दे चुकी है।

इस साल 20 जुलाई को भारत ने घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा देने और आगामी त्योहारी सत्र के दौरान खुदरा कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘‘भारत सरकार की प्रतिबद्धता है कि खाद्य असुरक्षित, कमजोर देशों और पड़ोसी देशों के अनुरोध के मामले में, वह आवश्यक मात्रा में चावल या गेहूं उपलब्ध कराएगी।’’

भारत ने यह भी तर्क दिया है कि निजी कारोबारियों को बाजार की स्थितियों में हेरफेर करने से रोकने के लिए, डब्ल्यूटीओ में अग्रिम अधिसूचनाएं प्रदान नहीं की गईं।

इसके अलावा ये उपाय अस्थायी हैं और घरेलू मांग और आपूर्ति की स्थिति के आधार पर आवश्यक समायोजन की अनुमति देने के लिए इसकी नियमित समीक्षा की जाती है।

जिनेवा स्थित व्यापार अधिकारी ने कहा कि अमेरिका सहित विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों के एक समूह ने भारत द्वारा गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने पर चिंता जताई है और कहा है कि इस फैसले से आयात पर निर्भर देशों पर असर पड़ सकता है।

अमेरिका ने भारत से इस निर्यात प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से हटाने का आग्रह किया है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘इन देशों ने तर्क दिया है कि ऐसे उपायों का उन देशों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है जो इन कृषि वस्तुओं के आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं, खासकर संकट के समय में।

जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, यूरोपीय संघ, न्यूज़ीलैंड, स्विट्ज़रलैंड, थाइलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका द्वारा एक दर्जन से अधिक सवाल उठाए गए थे।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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