नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) बैंक कर्मचारियों के नौ संगठनों के संयुक्त मंच यूएफबीयू ने बुधवार को संशोधित प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) फॉर्मूले के एकतरफा कार्यान्वयन को तत्काल रद्द करने की मांग की।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने एक बयान में कहा कि वित्तीय सेवा विभाग द्वारा लागू किए जाने वाले संशोधित पीएलआई फॉर्मूले को कर्मचारी एकतरफा और विभाजन पैदा करने वाले कदम के रूप में देखते हैं। मौजूदा समझौता-आधारित पीएलआई योजना द्विपक्षीय चर्चाओं के माध्यम से विकसित की गई थी और द्विपक्षीय समझौता/संयुक्त नोट रूपरेखा में शामिल की गई थी।
बयान के अनुसार, यह मामला पहले से ही मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के कार्यालय में सुलह के लिए विचाराधीन है।
नौ मार्च, 2026 को हुई सुलह कार्यवाही में मौजूदा द्विपक्षीय समझौता/संयुक्त नोट के तहत वित्त वर्ष 2024-25 के लिए स्केल चार से सात के अधिकारियों को पीएलआई के भुगतान का मुद्दा सक्रिय रूप से विचाराधीन रहा और सुलह और द्विपक्षीय चर्चाओं के माध्यम से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ऐसी स्थिति में, सुलह प्रक्रिया के लंबित रहने के दौरान वित्तीय सेवा विभाग, भारतीय बैंक संघ या व्यक्तिगत बैंक प्रबंधन द्वारा किसी भी प्रकार का एकतरफा कार्यान्वयन पूरी तरह से अस्वीकार्य है और व्यवस्थित एवं वैध औद्योगिक संबंधों की आवश्यकता के अनुरूप नहीं है।
बयान के अनुसार, इसलिए, यूएफबीयू वित्तीय सेवा विभाग, भारतीय बैंक संघ और सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रबंधन से आग्रह करता है कि वे सभी एकतरफा कदमों को तुरंत रोकें और बातचीत और समझौता के माध्यम से मामले का शीघ्र समाधान करें।
भाषा रमण अजय
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